बातिनी बीमारी गुरूर तकब्बुर और उसका इलाज

इस पोस्ट में गुरूर तकब्बुर के बारे में बताया गया है के गुरूर तकब्बुर क्या है, इसके नुकसान और अंजाम क्या है। और इसका इलाज क्या है।

इंसान की ज़िन्दगी में जिस तरह जिस्मानी सेहत और तंदरुस्ती की अहमियत है, ठीक इसी तरह दिल और रूह की सेहत और तंदरुस्ती भी बहुत ज़रूरी है। अपने जिस्म की बीमारी को इंसान अक्सर जल्दी महसूस कर लेता है, और बीमारी मालूम होने पर, उसके इलाज की फ़िक्र करता है, बीमारी का इलाज करवाता है। लेकिन यही इंसान जो जिस्म की बीमारी पर बे चैन हो जाता है, और जल्द से जल्द जिस्मानी बीमारी का इलाज करवाता है, यही इंसान दिल और बातिन की बीमारियों पर तवज्जो नहीं देता है, ध्यान नहीं देता है, फिर नतीजा यह होता है के, बातिनी बीमारियाँ धीरे-धीरे इंसान की सोच, उसके अख्लाक, और उसके आमाल को मुतास्सिर करती रहती हैं।

जिस तरह ज़ाहिरी जिस्म में कोई बीमारी लग जाए, कोई मर्ज़ लाहिक हो जाए, तो पूरा जिस्म बीमार पड़ जाता है। इसी तरह इंसान की रूह व क़ल्ब और सोच व फ़िक्र से मुतअल्लिक भी कई अमराज़ हैं, जिनकी वजह से क़ल्ब व रूह बीमार हो जाते हैं, और जिसके बाइस इंसान का बातिन आलूदा और बीमार हो जाता है।

बातिनी बीमारियाँ

बातिनी बीमारियाँ बहुत सी हैं, जैसे रियाकारी, बुग्ज़ व हसद, हिर्स व लालच, बदगुमानी, गुरूर व तकब्बुर, यह सब बातिनी बीमारियाँ हैं। और इन बातिनी बीमारियों की वजह से बातिन बीमार हो जाता है। 

हम इन बातिनी बीमारियों में से एक बीमारी गुरूर व तकब्बुर के बारे में बताएँगे के, गुरूर व तकब्बुर क्या है, इसके नुकसान क्या हैं, और इस से कैसे बचा जा सकता है, और इसका इलाज क्या है। 

गुरूर तकब्बुर क्या है

तकब्बुर क्या है? तकब्बुर यह है के इंसान खुद को दूसरों से बेहतर व फाइक समझे, दूसरों को हकीर व कमतर समझे, अपने कामों को दूसरों से अच्छा और ऊँचा जानें, के मैंने जैसा काम किया वैसा कोई नहीं कर सकता, वगैरह-वगैरह, इस तरह के ख्यालात से उसके दिल में तकब्बुर पैदा होता है।

तकब्बुर का अंजाम

गुरूर व तकब्बुर वह बीमारी है, जिसकी वजह से शैतान मरदूद हुआ। रब करीम इरशाद फरमाता है: قَالَ فَاهْبِطْ مِنْهَا فَمَا یَكُوْنُ لَكَ اَنْ تَتَكَبَّرَ فِیْهَا فَاخْرُ جْ اِنَّكَ مِنَ الصّٰغِرِیْنَ यानी अल्लाह ने फरमाया, तू यहाँ से उतर जा तुझे यह हक हासिल नहीं की, यहाँ रहकर गुरूर करे, निकल तू ज़िल्लत वालों में से है। (पारा 8, सूरह अल आराफ, 13)।

और इसी के तहत तफसीर खज़ाइनुल इरफ़ान में है: के इंसान तेरी मज़म्मत करेगा, और हर जुबान तुझ पर लानत करेगी, और यही तकब्बुर वाले का अंजाम है। (तफसीर खज़ाइनुल इरफ़ान)। देखा आपने गुरूर व तकब्बुर का अंजाम।

तकब्बुर नहीं करना चाहिए

अल्लाह तआला इंसान को नेअमतों से नवाज़े, हुस्न ओ जमाल अता फरमाए, इज़्ज़त ओ शोहरत दे, मक़ाम ओ मंसब अता फरमाए, इल्म व हुनर दे, माल ओ दौलत अता फरमाए, तो इंसान को घमंड तकब्बुर नहीं करना चाहिए, बल्के नेअमतों के मिलने पर अल्लाह तआला का शुक्र अदा करना चाहिए, और इज्जो इन्किसारी इख़्तियार करना चाहिए, और उस फल दार दरख़्त की तरह होना चाहिए, जिस में फल लगते हैं, के जब फल दार दरख़्त में उसकी टहनियों में फल लगते हैं, तो दरख़्त की टहनियां झुक जाती हैं, जितना फल ज़्यादा लगता है, उतनी ही ज़्यादा टहनियां झुक जाती हैं। इसी तरह से जब अल्लाह तआला इंसान को नेअमतों से नवाज़े, तो इज्जो इन्केसारी इख्तियार करना चाहिए, और तकब्बुर गुरूर घमंड नहीं करना चाहिए, बल्कि तकब्बुर से बचना चाहिए।

तकब्बुर का इलाज

जैसे जिस्मानी बीमारी का इलाज दवा और परहेज़ से होता है, वैसे ही तकब्बुर की बीमारी का इलाज रूहानी मुरक्कब है। हज़रत सय्यिदेना अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ीअल्लाहु अन्हु से रिवायत है, हुज़ूर नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं: "सलाम में पहल करने वाला तकब्बुर से दूर हो जाता है" यानी जो शख्स मुसलमानों को सलाम कर लिया करे, वह इंशा अल्लाह मुतकब्बिर न होगा, उसके दिल में इज्ज़ ओ नियाज़ होगा। (शुअबुल ईमान, व मिरात अल मनाजीह)।

तकब्बुर का एक इलाज सलाम भी है, हमें चाहिए के हम हर मुसलमान से सलाम करें, चाहे अमीर हो, गरीब हो, बड़ा हो, छोटा हो, सलाम करें।  कोशिश करें कि सलाम की इब्तिदा हमारी तरफ से हो, यानी सलाम में पहल करें। हमारे आक़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तो बच्चों को भी सलाम में पहल फ़रमाते थे। हज़रत अनस बिन मालिक रज़ी अल्लाहु अन्हु एक मर्तबा कुछ लड़कों के पास से गुज़रे तो हज़रत अनस ने उन लड़कों को सलाम किया, और फरमाया रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम भी इसी तरह किया करते थे। (बुखारी) ।

सलाम करना सुन्नत है, और सलाम में पहल करना भी सुन्नत है। सुब्हानअल्लाह

खुलासा

इस पूरे मज़मून से यह बात सामने आती है के, गुरूर व तकब्बुर इन्सान के दिल की ऐसी बीमारी है, जो इंसान को बर्बाद कर देती है। हमें इस बुरी बीमारी से बचना चाहिए, और गुरूर व तकब्बुर का जो इलाज बताया गया है, यानी  सलाम करना, तो हमें चाहिए के हम हर मुसलमान से चाहे वह अमीर हो, गरीब हो, छोटा हो, बड़ा हो, सलाम करना चाहिए, जब हम सलाम करने की आदत बना लेंगे, तो जो तकब्बुर की बातिनी बीमारी है वह खत्म हो जायेगी। और इस अमल से यह भी फायदा होगा कि मुसलमानों में आपसी एकता और मुहब्बत मज़बूत होगी।

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