Barahvin ka Juloos Aur Ham

जश्न ईद मीलादुन्नबी के जुलूस का मकसद और पैगाम क्या है और हमें जुलूस में क्या करना चाहिए इस पोस्ट में बताया गया है।

रबीउल अव्वल शरीफ, यह वह मुबारक महिना है, के इस महीने की बारह तारीख यानि बारह रबीउल अव्वल शरीफ को बरोज़ पीर सुबह सादिक के वक़्त हुज़ूर रहमतुल लिल आलमीन सरवरे काएनात हमारे आक़ा व मौला हुज़ूर नबी ए अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की विलादत ब सआदत हुई, आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इस दुनिया में तशरीफ़ लाए।

बारह रबीउल अव्वल का जुलूस

आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की विलादत ब सआदत की ख़ुशी में, नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की आमद की ख़ुशी में, दुनिया भर में जहाँ-जहाँ आशिक ए रसूल बसते हैं, दुनिया के जिस-जिस कोने में मोमिन मुसलमान आबाद हैं, गुलामाने रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रहते हैं, तो सभी आशिकाने रसूल, मोमिन मुसलमान, सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की विलादत की ख़ुशी मनाते हैं, आपकी आमद पर ख़ुशी का इज़हार करते हैं, तमाम मुसलमनाने आलम सरकार ए दो आलम की आमद की खुशियाँ बहुत जोश ओ खरोश के साथ मनाते हैं, आपकी तशरीफ़ आवरी पर मुहब्बत और ख़ुशी का इज़हार किया जाता है, महफिले मीलाद का अहतेमाम किया जाता है, और बारह रबीउल अव्वल शरीफ को जुलूस निकाला जाता है। जहाँ हम पर बारह रबीउल अव्वल को जुलूस निकालकर ख़ुशी का इज़हार करते हैं, मुहब्बत का इज़हार करते हैं, वहीँ हम दुनिया को अमन ओ सलामती का पैगाम भी देते हैं, साथ ही आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत मुबारक और तालीमात को आम करते हैं।

हमारा जुलूस कैसा हो

अल्लाह तआला कुरान ए अज़ीम में फरमाता है: وما أرسلناك إلا رحمة للعالمين यानी ए महबूब हमने आपको सारे जहांन के लिए रहमत बनाकर भेजा, (सूरह अल-अम्बिया : 107)।

हमारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सारे जहाँन के लिए रहमत बनकर तशरीफ़ लाए हैं, आप रहमतुल लिल आलामीन हैं, जब हमारे आक़ा सल्लाल्ल्हू अलैही वसल्लम सरापा रहमत हैं, तो रहमत वाले नबी के नाम पर जो हम जुलूस निकालते हैं, तो हमारा जुलूस, मुहब्बत, अदब, और अच्छे अखलाक का नमूना होना चाहिए, और लोगों  तक जो पैगाम जाए वोह लोगों तक मुहब्बत अदब और अच्छे अखलाक का पैगाम जाए।

रास्ते में किसी को तकलीफ न दें

आप नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत पढ़ेंगे, आपकी तालीमात का मुताला करेंगे तो आपको मालूम होगा के, हमारे आक़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने रास्ते के भी आदाब सिखाए हैं। हुज़ूर नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने रास्ते से तकलीफ देने वाली चीज़ को हटाने को भी सदका फरमाया है, सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फरमाते हैं, "रास्ते से किसी तकलीफ देह चीज़ को हटा देना सदक़ा है" (बुखारी व मुस्लिम)।

इसलिए हर आशिक़ ए रसूल को चाहिए, जुलूस में शरीक हर गुलामने रसूल को चाहिए के हमारी वजह से किसी भी शख्स को कोई भी तकलीफ नहीं होनी चाहिए, किसी को कोई भी परेशानी नहीं होनी चाहिए, हमें चाहिए के जब हम जुलूस में हों तो इस बात का ख़ास ख्याल रखा जाए के ट्रेफिक जाम ना हो ताकि किसी एम्बुलेंस, मरीज़ो या रास्ते से गुज़रने वाले लोगों को कोई भी तकलीफ न हो, और कोशिश यह करें के जुलूस रास्ते के एक तरफ से गुज़रे, ताके जो ज़रुरत मंद आने जाने वाले लोग हैं उन्हें कोई भी और किसी भी तरह की कोई दिक्कत न हो।

सफाई का ख्याल रखें

इसी तरह से सफाई का भी ख्याल रखें, के कोई कचरा, पानी पाउच, बोतल, कागज़, कागज़ की प्लेट, प्लास्टिक की पन्नी वगैरह सड़क पर न फेंके, ट्रेफिक नियमों का ख्याल रखें, और प्रशाशन की जो हिदायतें हैं उनको भी फॉलो करें, किसी भी अपने मुस्लमान भाई या किसी भी इंसान से बद्तमीज़ी और झगड़ा न करें।

याद रखिये: हम गुलामाने रसूल ने अपने आक़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मुहब्बत में जुलूस को निकाला है, हमारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ही हमें यह तालीम दी है के दूसरों को तकलीफ न दो, दूसरों को तकलीफ देने से बचना सिखाया है।

मुसलमानों तक पैगाम पहुंचाएं

जुलूस ए मुहम्मदी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के ज़रिए लोगों को अमन ओ मुहब्बत और भाईचारा का पैगाम दें, जुलूस में आक़ा ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शान ओ अज़मत ब्यान करें, आपकी सीरत पर तक़रीर करें, दरूद ओ सलाम पढ़ें, नअत ए रसूल पढ़ें, और कुछ बैनर भी बनायें, जिस में यह लिखवायें,नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मुहब्बत करो, नमाज़ खुद भी क़ाइम करो, और बच्चों को भी तलकीन करो, खुद भी झूट से बचो, बच्चों को भी झूट से बचाओ, इसी तरह यह भी लिखो बैनर में के गीबत से अपने आपको बचाओ, अपने बच्चो को भी गीबत करने सुनने से बचाओ, आज तुम अपने वालिदैन का अदब करोगे, कल तुम्हारे बच्चे तुम्हारा अदब ओ अहतराम करेंगे, पड़ोसी के जो हुकूक हैं उन्हें अदा करो, हर इन्सान के साथ अच्छा बर्ताव और अच्छा सुलूक करो। इस तरह के आप बैनर बनाकर जुलूस में लेकर चलें और मुसलमानों को पैगाम दें।

दोस्तों, यह वही पैगाम है, यह वही संदेश है, जिसकी आज हमारे मुआशरे और समाज में बहुत ज़्यादा ज़रूरत है।

किरदार को बेहतर बनाओ

जब बारह रबीउल अव्वल शरीफ आती है तो हम जुलूस के लिए झंडे झंडियाँ लगाते हैं, और दीगर किस्म से रास्तों को सजाते हैं, जिस तरह से हम यह सब अहतमाम करते हैं, तो हमें चाहिए के इसी तरह से अपने किरदार को सजाना चाहिए, सुन्नतों पर अमल करना चाहिए, शरीअत पर अमल करना चाहिए। 

आखरी पैगाम

जहां हम जश्न ईद मीलादुन्नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मनाते हैं, जुलूस निकालकर मुहब्बत का इज़हार करते हैं, तो वहीँ हम नमाज़ों की भी पाबंदी करें, और आक़ा ए दो जहाँ सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुसीरत और सुन्नतों पर अमल करने की कोशिश करें। 

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