हुज़ूर की अता जिसको जो चाहें अता फर्मा दें

इस लेख में हदीस की रौशनी में यह साबित किया गया है कि हमारे हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मुख्तार ए कुल हैं, हदीस में वाज़ेह ज़िक्र है, आप भी पढ़िए।

हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम की अता: इस पोस्ट में हदीस की रौशनी में यह बताने वाला हूँ के हमारे प्यारे नबी हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम को अल्लाह तआला ने मालिको मुख्तार बनाकर भेजा है, और इख्तियार अता फरमाया है। जिसको जो चाहें अता फ़र्मा दें। जानिए इस आर्टिकल में कि कैसे हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम अपने चाहने वालों को अपने करम से नवाज़ते हैं और जो चाहें, उन्हें अता कर सकते हैं, सीने को रोशन और ईमान को ताज़ा कर देने वाली तहरीर को पढ़िए।

हुज़ूर जो चाहें वह अता फरमा दें 

हज़रत रबीआ अस्लमी कहते हैं कि मैं रात को हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम की ख़िदमत में था। मैं ने हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम को वुज़ू के लिये पानी और दीगर सामाने ज़रूरत पेश किया तो हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम ने फरमाया जो चाहो वह माँग लो, मैं ने अर्ज़ किया या रसूलुल्लाह जन्नत माँगता हूँ और इसमें आप का साथ। हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम ने फरमाया, क्या इसके अलावा और भी कुछ माँगना है ? मैंने अर्ज़ किया हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम यही चाहिये। फरमाया ज़्यादा सजदों से अपने नफ़्स की इस्लाह करके मेरी मुआविनत करो। (मिश्कात सफहा 84, मुस्लिम जि01, सफहा 83)

इस हदीस की शरह करते हुए मौलाना अली कारी मक्की अलैहिर रहमा मिरकात शरह मिशकात में फरमाते हैं
यानी हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम का यह फरमाना कि जो चाहो वह माँगो से पता चलता है कि खुदाए तआला ने आप को अपने ख़ज़ाने में से जो चाहें वह देने का इखतियार दिया है इसी लिये हमारे बुज़ुरगों ने इस बात को हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम की खुसूसियात में से शुमार किया है कि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जिसको जो चाहें वह अता फरमाते हैं। (मिरकात शरह मिश्कात जिल्द 1 सफहा 550)

यह हदीस बिलकुल साफ और वाज़िह है कि जिस में हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम के मुख्तारे कुल होने का ज़िक्र इतना अयाँ और ज़ाहिर है कि ज़हन पर ज़ोर देने की भी ज़रूरत नहीं। यह हदीस उन लोगों को बहुत खलती है जो हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम के इखतियारात की मुखालेफ़त करते हैं। इसी लिये वह लोग इस हदीस में इधर उधर की तावालात करते हैं और माना गढ़ कर हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम की शान घटाते हैं।

अल्लाह की अता से हुज़ूर मालिके जन्नत और कासिमे जन्नत 

हज़रत रबीआ से हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम का यह फरमाना कि जो चाहो वह माँग लो और फिर इनका हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम से जन्नत माँगना और हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम का यह न फरमाना कि यह मेरे बस की बात नहीं बलकि अल्लाह से माँगो। बलकि यह फरमाना कि और भी जो चाहो माँग लो इन सब से पता चलता है कि अल्लाह तआला ने हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम को मालिके जन्नत और कासिमे जन्नत बना दिया है, और यह फ़रमाना सजदे ज़्यादा किया करो। इसका मतलब सिर्फ यह है कि जन्नत के वादे पर ग़ाफ़िल होकर बैठ जाना भी मुनासिब नहीं, बल्कि इबादत भी करते रहो।

और तकरीबन पाँच सौ साल क़ब्ल के मुहद्दिस व शारेह मौलाना अली कारी मक्की की शरह "मिरकात" की इबारत जो हमने नकल की है इस से साफ ज़ाहिर हो जाता है कि पहले के उलमा व फुज़ला इस हदीस से यही मुराद लेते थे। वह गैर ज़रूरी कील व काल पर यकीन नहीं रखते थे। बलकि सीधे साधे हदीस के माना पर ही ईमान रखते थे।..
दोस्तों आपने सारा आर्टिकल पढ़ा इस से यह बात वाज़ेह होती है कि हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम को अल्लाह तआला ने अपने खज़ानों का मालिक और मुख्तारे कुल बनाया है। आपके पास वह इख्तियार है कि जो चाहें, जिसे चाहें, और जितना चाहें अता फरमा सकते हैं।

खातिमा

दोस्तों, यह हमारा ईमान और इश्क है कि हम अपने नबी की अता को मानें और हमारे नबी अल्लाह की अता से मालिको मुख्तार हैं!  हुज़ूर के बताए रास्तों पर अमल करें। हुज़ूर की मोहब्बत से अपने दिलों को रौशन करें और नमाज़ की पाबन्दीकरें, जन्नत और जन्नत में आपकी सोहबत की दुआ माँगते रहें। दुरूद व सलाम की बरकत से अपने ईमान को ताज़ा करते रहिए। जज़ाक अल्लाह खैर।

About the author

JawazBook
JawazBook सुन्नी इस्लामी ब्लॉग है, जहाँ हम कुरआन, हदीस, और सुन्नत की रौशनी में तैयार किए गए मज़ामीन पेश करते हैं। यहाँ आपको मिलेंगे मुस्तनद और बेहतरीन इस्लामी मज़ामीन।

एक टिप्पणी भेजें

please do not enter any spam link in the comment box.