एक छोटा सा काम और दस गुना सवाब

हदीस में एक बहुत प्यारा वाक़िया आता है कि एक शख़्स को महज़ इस वजह से बख्श दिया गया कि उसने रास्ते से काँटों से भरी हुई एक टहनी हटा दी थी,

प्यारे इस्लामी भाइयो और बहनो अल्लाह तआला का शुक्र है जिसने हमें ईमान की नेअत से नवाज़ा और हमारे नबी हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत को हमारे लिए रहमत बनाया आज हम एक ऐसे अमल की बात करेंगे जो बाज़ाहिर बिल्कुल मामूली लगता है लेकिन अल्लाह के यहाँ इतना अज़ीम दर्जा रखता है कि उसपर पर दस गुना सवाब मिलता है।

अमल छोटा और सवा दस गुना

भाइयो और बहनो वह अमल कोई बड़ी मशक्कत वाला नहीं है बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में हर किसी के बस की चीज़ है वह क्या है वह रास्ते से तकलीफ़देह चीज़ हटाना है।

जी हाँ रास्ते से एक काँटा शीशे का टुकड़ा केले का छिलका गंदगी लकड़ी की टहनी या पत्थर जो किसी राहगीर को जिस से ठोकर लग सकती है राहगीर को गिरा सकती है या तकलीफ़ पहुँचा सकती है काम छोटा है लेकिन इस पर सवाब सुब्हानअल्लाह इसके करने वाले के लिए दस गुना नेकियों का वादा है।

पहली हदीस एक नेकी दस का सवाब

इस सिलसिले में हज़रत अबू उबैदा बिन जर्राह रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया।

مَنْ مَازَ أَذًى عَنْ طَرِيقٍ فَلَهُ حَسَنَةٌ وَالْحَسَنَةُ بِعَشْرِ أَمْثَالِهَا

तर्जुमा: जिस शख़्स ने रास्ते से कोई तकलीफ़देह चीज़ दूर की तो उसके लिए एक नेकी लिखी जाएगी और एक नेकी का सवाब उस जैसी दस नेकियों के बराबर है। मुस्नद अहमद हदीस 1700 और मुहक़्क़िक़ीन के नज़दीक यह हदीस हसन दर्जे की है।

भाइयो और बहनो इस हदीस में दो बातें ग़ौरतलब हैं

पहली माज़ा यानी हटाना यहाँ पर ज़ोर अमल पर है सिर्फ़ यह सोचना कि हाँ यह तो अच्छा है काफ़ी नहीं असल में उसे हाथ से हटाना है चाहे वह पत्थर हो काँटा हो या गंदगी।

दूसरी एक नेकी दस का सवाब अल्लाह ने कुरआन में वादा किया है कि जो एक नेकी लेकर आएगा उसे दस गुना मिलेगा यह हदीस उसी कुरआनी उसूल की मिसाल है।

दूसरी हदीस ईमान की शाखाओं में से एक

जहाँ इस अमल यानी रास्ते से तकलीफ देने वाली चीज़ को हटाने पर सवाब है वहीं यह अमल हमारे ईमान का ही एक हिस्सा है। सहीह बुखारी और सहीह मुस्लिम में हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया।  الْإِيمَانُ بِضْعٌ وَسَبْعُونَ شُعْبَةً وَأَدْنَاهَا إِمَاطَةُ الْأَذَى عَنِ الطَّرِيقِ

तर्जुमा: ईमान की सत्तर से कुछ ऊपर शाखाएँ हैं और उनमें से सबसे अदना शाखा रास्ते से तकलीफ़देह चीज़ हटाना है। (सहीह बुखारी किताब उल ईमान हदीस 9 सहीह मुस्लिम किताब उल ईमान हदीस 35)

सोचिए  जब हम रास्ते से एक काँटा हटाते हैं तो यह ईमान का एक जुज़ भी है इसलिए यह अमल मामूली चीज़ नहीं।

रास्ते से तकलीफ देने वाली चीज़ हटाना दीन का हिस्सा है

अब यही मसअला फ़िक़्ह की किताबों में देखें फ़तावा हिंदिया जो हनफ़ी फ़िक़्ह की बहुत मानी हुई किताब है उस में साफ़ लिखा है, إِمَاطَةُ الْأَذَى عَنِ الطَّرِيقِ مِنَ الدِّينِ यानी रास्ते से तकलीफ़देह चीज़ दूर करना दीन मज़हब का हिस्सा है।

साथ ही उसी किताब में यह भी बयान किया गया है कि रास्ते में ऐसी चीज़ डालना जिससे लोगों को रुकावट या तकलीफ़ हो नाजायज़ और गुनाह है और उसे हटाना कार ए सवाब है यानी इस्लाम सिर्फ़ हटाने का हुक्म नहीं देता बल्कि खुद डालने को मना करता है।

(अल फ़तावा अल हिंदिया जिल्द 5 सफ़्हा 342)

काँटों भरी टहनी हटाने से मग़फिरत

हदीस में एक बहुत प्यारा वाक़िया आता है कि एक शख़्स को महज़ इस वजह से बख्श दिया गया कि उसने रास्ते से काँटों से भरी हुई एक टहनी हटा दी थी ताकि मुसलमानों को तकलीफ़ न हो इस वाक़िया से हमें मालूम हुआ कि अल्लाह के यहाँ छोटे अमल की बड़ी क़द्र है जब एक काँटों भरी टहनी हटाने पर बख्शिश हो गई तो हम रोज़ाना कितने ऐसे मौके गँवा देते हैं जो हमारे लिए निजात का ज़रिया हो सकते थे।

सदक़ा का सवाब

हम अक्सर सोचते हैं कि सदक़ा सिर्फ़ माल से दिया जाता है लेकिन अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमें सिखाया कि हर वह अमल जो अल्लाह की मख़लूक़ को आसानी पहुँचाए वह अल्लाह के यहाँ सदक़ा का दर्जा रखता है रास्ते से कोई तकलीफ़देह चीज़ हटाना भी एक सदक़ा है कितना आसान है न बिना जेब से एक पैसा निकाले बिना किसी बड़ी तैयारी के हम दस गुना सवाब और सदक़े का सवाब दोनों कमा सकते हैं।

यह अमल क्यों इतना अज़ीम है

इस अमल की अज़मत के पीछे एक बड़ी हिकमत यह भी है कि यह तकलीफ़ को दूर करने का अमल है इस्लाम खैर ख्वाही का दीन है जब हम रास्ते से एक पत्थर हटाते हैं तो हम न जाने कितने लोगों को ठोकर लगने गिरने या ज़ख्मी होने से बचाते हैं यही वह सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी है जो इस्लाम हमें सिखाता है एक मुसलमान सिर्फ़ अपनी ज़ात के लिए नहीं जीता बल्कि वह दूसरों की आसानी के लिए कोशाँ रहता है।

आज के लिए अमली पैग़ाम

भाइयो और बहनो हम रोज़ कितनी बार सड़कों गलियों बाज़ारों से गुज़रते हैं फुटपाथ पर शीशे के टुकड़े बीच रास्ते में पड़ा पत्थर सड़क पर गिरा केले का छिलका या कहीं काँटों वाली टहनी हम शिकायत तो खूब करते हैं कि लोग रास्ते गंदे कर देते हैं लेकिन क्या हमने कभी उसे हटाने की ज़हमत उठाई।

आज से हम यह तय कर लें कि हर उस चीज़ को जो किसी के लिए तकलीफ़ का सबब बन सकती है हम हटा देंगे चाहे वह हमारी गली हो या कोई सार्वजनिक जगह यह अमल न सिर्फ़ हमारे लिए सवाब का ज़रिया बनेगा बल्कि इससे दूसरों का भला भी होगा।

भाइयो इस्लाम हमें यह तालीम देता है कि दूसरों का दुख दूर करना भी इबादत है रास्ते का एक काँटा हटाने से जहाँ दुनिया में किसी का भला होता है वहीं आख़िरत में हमारे लिए निजात का सामान बन जाता है। हम में से हर एक आज से यह अहद करे कि जब भी रास्ते में कोई तकलीफ़देह चीज़ देखेगा उसे हटा देगा इस अमल को कभी मामूली न समझेगा अपने बच्चों को भी यह सुन्नत सिखाएगा दूसरों को भी इस नेकी की तरफ़ बुलाएगा।

नसीहत

याद रखिए क़यामत के दिन जब हमारा नामए आमाल पेश होगा तो ये छोटे छोटे नेक अमल भी बड़ी नेकियों की तरह रौशन होंगे एक पत्थर हटाने पर दस नेकियाँ एक काँटा हटाने पर दस नेकियाँ एक शीशे का टुकड़ा हटाने पर दस नेकियाँ कितनी आसान कमाई है।

इख़्तिताम और  दुआ

भाइयो और बहनो आख़िर में हम अपने रब से दुआ करते हैं या अल्लाह हमें रास्ते की हर उस चीज़ को हटाने वाला बना जो तेरे बंदों को तकलीफ़ देती है हमारे ईमान को मज़बूत फरमा हमें हर छोटे बड़े नेक अमलों की अहमियत समझने की और उन पर अमल की तौफीक़ अता फरमा हमारी इन छोटी सी कोशिशों को अपनी बारगाह में क़बूल फरमा और हमारे लिए ज़रिया ए निजात बना आमीन।

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