दरूद पढ़ने वाले के लिए अज़ीम बशारत

दोस्तों आप इस पोस्ट में जानेंगे के दरूद शरीफ की फ़ज़ीलत क्या है और दरूद पढने वाले के लिए क्या बशारत है

हमारे दीन की ख़ूबसूरती में से एक ख़ूबसूरत पहलू यह है कि इसमें हर एक नेकी हर एक छोटे से अच्छे काम का बड़ा अज्र व सवाब रखा गया है। इन्हीं में से एक आसान सरल मगर बेहद फ़ज़ीलत वाला अमल है हमारे आक़ा हमारे मौला हमारे नबी-ए-करीम मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर दरूद व सलाम भेजना। यह कोई आम ज़िक्र नहीं बल्कि ख़ुदा-ए-करीम की ख़ास रहमतों को नाज़िल करने का एक ज़रिया है।

हदीस मुबारक जिबरील ए अमीन की बशारत

हज़रत अब्दुर रहमान बिन औफ़ रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया:

إِنِّي لَقِيتُ جِبْرِيلَ عَلَيْهِ السَّلَام فَبَشَّرَنِي ، فَقَالَ : إِنَّ رَبَّكَ يَقُولُ : مَنْ صَلَّى عَلَيْكَ صَلَّيْتُ عَلَيْهِ ، وَمَنْ سَلَّمَ عَلَيْكَ سَلَّمْتُ عَلَيْهِ . فَسَجَدْتُ لِلَّهِ شُكْرًا.

(अल-मुस्तदरक अल-सहीहैन, रक़मुल हदीस: 2019, हुक्मुल हदीस: सहीह (तलख़ीसुज़-ज़हबी के मुताबिक़))

तर्जुमा व तशरीह

मैं हज़रत जिबरील अलैहिस्सलाम से मिला तो उन्होंने मुझे ख़ुशख़बरी दी और कहा: तुम्हारा रब फरमाता है जो शख़्स तुम पर दरूद भेजता है मैं उस पर रहमत नाज़िल फरमाता हूँ और जो तुम पर सलाम भेजता है मैं उस पर सलाम भेजता हूँ। हज़रत सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम फरमाते हैं मैं ने इस पर बारगाह ए इलाही में सजदा ए शुक्र अदा किया।

अल्लाह का पैग़ाम

इस हदीस मुबारक पर गौर करें तो यह मालूम होगा की यह ख़ुदा-ए-तआला का अपने हबीब सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के ज़रिए से गुलामाने रसूल  सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नाम एक ख़ास पैग़ाम है। यह एक ऐसा वादा है जो इंसान को सीधे अपने रब का  क़ुर्ब अता फरमाता है। तसव्वुर करें: एक इंसान ज़मीन पर बैठ कर अपने नबी पर दरूद भेजता है और आसमानों का मालिक अर्श का रब ख़ुद उस पर अपनी रहमत नाज़िल फरमाने का एलान करता है!

अल्लाह का अपने बन्दे पर सलात भेजने का मतलब क्या है?

अल्लाह तआला का अपने बन्दे पर "सलात" (दरूद भेजना) का मतलब है उस पर रहमत नाज़िल करना उसे अपनी मेहरबानियों से नवाज़ना उसकी ग़लतियों को माफ़ करना उसके दर्जे बुलंद करना। यानी एक छोटा सा अमल जो हमारी ज़बान से निकलता है उसका बदला ख़ुदा की ख़ास रहमत और मग़फ़िरत की शक्ल में मिलता है।

जो तुम पर सलाम भेजता है मैं उस पर सलाम भेजता हूँ

यहाँ "सलाम" का मतलब है। जब अल्लाह तआला अपने बन्दे पर "सलाम" भेजता है तो इसका मतलब है उसे हर तरह की आफ़तों बलाओं से महफ़ूज़ रखना उसे अपनी पनाह में ले लेना। यह एक ऐसा तहफ्फुज़ है जिसके आगे कोई ताक़त नुक़सान नहीं पहुँचा सकती।

हुज़ूर का सज्दा ए शुक्र अदा करना

नोट कीजिए: जब यह ख़ुशख़बरी हज़रत जिबरील अलैहिस्सलाम ने सुनाई तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़ौरन अल्लाह के आगे सजदा-ए-शुक्र अदा किया। यह हमारे लिए एक सबक़ है। आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने लिए नहीं बल्कि अपनी उम्मत के लिए मिली इस अनमोल नेमत पर शुक्र अदा किया। यह हमें सिखाता है कि हमें भी अल्लाह की नेमतों पर शुक्रगुज़ार होना चाहिए।

दरूद शरीफ महज़ ज़बानी इबादत नहीं

दरूद शरीफ महज़ ज़बानी इबादत नहीं बल्कि अल्लाह तआला की ख़ास रहमत को मुतवज्जह करने का ज़रिया है। यह एक ऐसा वसीला है जिसके ज़रिए इंसान अल्लाह के करीब होता है उसकी मग़फ़िरत हासिल करता है और उसकी रहमत के साये में आ जाता है। जो ज़बान नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर दरूद की आदी हो जाए वह अल्लाह की रहमत का मुसतहिक़ हो जाता है।

आवाम व ख़वास दोनों के लिए पैग़ाम

दरूद एक ऐसा नेक अमल है जिसे हर मुसलमान चाहे वह आलिम हो या आम बूढ़ा हो या जवान मर्द हो या औरत हर वक़्त हर हाल में अदा कर सकता है। इस के लिए न वज़ू की ज़रूरत है न क़िबला रुख़ होने की न किसी ख़ास जगह की। यह दिल की गहराइयों से निकलने वाला एक प्यार भरा तोहफ़ा है जो सीधे हमारे नबी के दिल तक पहुँचता है और फिर अल्लाह की रहमत बन कर हम पर वापस लौटता है।

अमली ज़िंदगी में दरूद पढ़ने का अहतेमाम कैसे करें

हर फ़र्ज नमाज़ के बाद दरूद पढ़ने का अहतमाम करें।

जब भी दरूद पढ़ें यह याद रखें कि आप पर अल्लाह की रहमत नाज़िल हो रही है।

सुबह उठते और रात को सोते वक़्त दरूद को अपनी रोज़मर्रा का हिस्सा बनाएँ।

ख़ुशी के पलों में शुक्र के तौर पर और मुसीबत के वक़्त में फ़रज के तौर पर दरूद को अपना शेवा बनाएँ।

इख़तिताम एक दावत ए अमन

यह हदीस हमें एक दावत देती है – अल्लाह की रहमत और सलामती की दावत। यह दावत हर उस शख़्स के लिए है जो अपने नबी से मुहब्बत  करता है उन की याद को ताज़ा रखता है। आइए हम इस दावत को क़बूल करें। अपनी ज़बान को दरूद  से तर रखें। अपने दिल को नबी की मुहबत से भर लें। यक़ीन मानिए जिस घर में जिस दिल में जिस ज़बान पर दरूद की बरकत होगी वहाँ अल्लाह की रहमत का नुज़ूल ज़रूर होगा।

अल्लाह तआला हम सब को कसरत से दरूद पढ़ने वालों में शामिल फरमाए हमारे दिलों को नबी की मुहब्बत से भर दे और हम पर अपनी ख़ास रहमत नाज़िल फरमाए। आमीन

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