wuzu ka shuru se aakhir tak ka tareeqa वुज़ू के ब्यान में

शरीअत ने तालीम-ए-तहारत के साथ साथ उस के तरीक़े भी बता दिये हैं, हम मुन्दरजा ज़ैल में इन्ही तीन में से एक यानि वुज़ू के बारे में मुख़्तसर बयान करेंगे।

इस्लाम में पाकी और सफ़ाई को बहुत अहमियत हासिल है। वुज़ू सिर्फ़ जिस्मानी सफ़ाई नहीं बल्कि रूहानी पाकीज़गी का भी ज़रिया है। नीचे वुज़ू का मुकम्मल ब्यान, उसके फ़र्ज़, सुन्नतें, मसह का तरीका, वुज़ू तोड़ने और मकरूह करने वाली बातें तफ़सील से बयान की गई हैं।

वुज़ू का बयान

वुज़ू गुस्ल और तयम्मुम इंसानी बदन की तहारत की मुख्तलिफ सूरतें हैं, शरीअत ने तज़किया-ए-नफ़्स के बाद इस पर बहुत ज़ोर दिया है और इस को फ़र्ज़ कर दिया है यहाँ इंसान की मर्ज़ी को दख़्ल नहीं बल्कि उस के जिस्म व जाँ यहाँ तक कि उस के लिबास पर मौला तआला का हुक्म जारी व सारी है और ये सब ख़ुद इंसान के अपने फ़ायदे के लिये है जिस से वो अपनी ना आक़िबत अंदेशी की वजह से गुरेज़ाँ नज़र आता है, शरीअत ने तालीम-ए-तहारत के साथ साथ उस के तरीक़े भी बता दिये हैं, हम मुन्दरजा ज़ैल में इन्ही तीन में से एक यानि वुज़ू के बारे में मुख़्तसर बयान करेंगे।

वुज़ू शुरू करने का तरीका

जब वुज़ू करे तो पहले पाक होने और हुसूल-ए-सवाब की नीयत कर के बिस्मिल्लाहिल अज़ीम वल्हम्दु लिल्लाहि अला दीनेल इस्लाम पढ़े और दोनों हाथ पंजों तक धोले और उँगलियों में ख़िलाल करे, फिर मिस्वाक करे और कुल्ली करे, फिर नाक में पानी दे कि हड्डी तक पहुँच जाए और बाएँ हाथ से नाक साफ़ करे, ये सब बातें मस्नून हैं।

चेहरे और दाढ़ी का बयान

इस के बाद चेहरे को पेशानी से ठोड़ी तक और एक कान की लो से दूसरे कान की लो तक धोए कि ये फ़र्ज़ है और दाढ़ी है तो ख़िलाल भी करे कि ये सुन्नत है!

खिलाल करने का तरीका

(के ख़िलाल इस सूरत में है जब कि दाढ़ी इतनी भरवाँ हो कि नीचे का बदन नज़र न आए वर्ना उस का धोना फ़र्ज़ है, भरवाँ दाढ़ी वाले को भी ठोड़ी के मुक़ाबिल बालों का धोना फ़र्ज़ है)

हाथ धोने का बयान

फिर दोनों हाथों को कहनियों समेत धो ले कि ये फ़र्ज़ है।

सर के मसह का बयान

फिर तमाम सर का (चौथाई सर का मसह फ़र्ज़ है) फिर कानों का फिर गर्दन का मसह करे, अव्वलुज़्ज़िक्र दो मस्नून हैं और आख़िरुज़्ज़िक्र मुस्तहब।

मसह का तरीका

(मसह सिर्फ़ एक बार करे उस की सूरत ये है कि दोनों हाथ तर कर के छंगली की तरफ़ की तीन तीन उँगलियों से पेशानी की तरफ़ से मसह करता हुआ गुद्दी की तरफ़ ले जाए और फिर हथेलियाँ लगा कर पेशानी की तरफ़ फेर लाए और कलिमा की उँगली से कान के अंदर का और अंगूठे से कान के पीछे का और हाथ की उल्टी तरफ़ से गर्दन का मसह करे)

पाँव धोने का बयान

फिर बाएँ हाथ से दोनों पाँव टखनों समेत धोए कि ये फ़र्ज़ है।

मोज़ों पर मसह का बयान

अगर मोज़े पहने हुए हो तो…

(अगर वुज़ू के बाद ऐसे मोज़े पहने हों जिन से टखने भी ढक गए हों और पानी उस में सरायत न करे तो अपने शहर में एक दिन रात तक वुज़ू के वक़्त उन पर सिर्फ़ मसह कर ले और छत्तीस कोस से ज़्यादा के सफ़र में तीन दिन और तीन रात तक इस तरह मसह करे कि हाथों की उँगलियाँ पैरों की उँगलियों पर रख कर हथेली समेत पिंडली की तरफ़ खींचता हुआ लाए लेकिन अगर मोज़े तीन उँगल की मिक़दार फटे हुए हों तो उन पर मसह दुरुस्त नहीं)

उँगलियों में ख़िलाल का तरीका

और उँगलियों में ख़िलाल करे ये सुन्नत है

उंगलियों में खिलाल का तरीका…

(बाईं छंगली से उँगलियों के दाहनी तरफ़ शुरू करे और छंगली को नीचे से ऊपर की तरफ़ ले जाए)

वुज़ू की तरतीब और एहतियात

लेकिन वुज़ू में ख़याल रखे कि दाहने अज़्व से शुरू करे और हर अज़्व के धोते वक़्त बिस्मिल्लाह पढ़े कि ये मुस्तहब है और हर अज़्व को तीन तीन बार धोए सिवाए मसह के ये सुन्नत है।

मुतज़क्करह बाला तरतीब के मुताबिक़ (यानी जो तरतीब वुज़ू के फ़र्ज़ों में बताई गई है) जल्द जल्द इस तरह अपने आज़ा धोए कि पहला उज़्व ख़ुश्क होने न पाए कि ये सुन्नत है और बाल बराबर भी ख़ुश्क न रह जाए वर्ना वुज़ू न होगा मुनासिब है कि वक़्त से पहले वुज़ू करे, अंगूठी पहना हुआ हो तो उस को इधर उधर फेरा ले ताकि बदन का वो हिस्सा ख़ुश्क न रह जाए, वुज़ू का बचा हुआ पानी खड़े हो कर पी ले और वुज़ू के बाद इन्ना अंज़लना और कलिमा-ए-शहादत पढ़े कि ये सब बातें मुस्तहब हैं।

वुज़ू तोड़ने वाली बातें

इन बातों से वुज़ू टूट जाता है, पेशाब व पाख़ाना की जगह से कोई चीज़ निकलना, बहने वाले ख़ून या पीप का निकल कर ऐसी जगह तक पहुँचना जिस का धोना नमाज़ में फ़र्ज़ है, आवाज़ से हँसना मजनून और बेहोश होना, सहारे से सोना, शहवत की हालत में खुली हुई दो शर्मगाहों का मिलना, मुँह भर के क़ै होना या मुँह से इतना ख़ून निकलना कि थूक सुर्ख़ हो जाए।

वुज़ू को मकरूह करने वाली बातें

इन बातों से वुज़ू मकरूह हो जाता है पानी में इसराफ़ करना या फिर तेल की तरह चुपेड़ना दूर से छपका मारना, बिला ज़रूरत दुनियावी बातें करना, तीन बार नए पानी से मसह करना ना पाक जगह या औरत के बचे हुए पानी से या मस्जिद के फ़र्श पर वुज़ू करना, जिस पानी से वुज़ू करे उस में थूकना या सिंकना या क़िबला रुख़ पैर धोना, कुल्ली और नाक के वास्ते बाएँ हाथ से पानी लेना दाएँ हाथ से नाक साफ़ करना किसी बर्तन को सिर्फ़ अपने वुज़ू के लिये ख़ास करना।

एंडिंग

अल्लाह तआला हमें सही तरीके से वुज़ू करने, पाकी हासिल करने और शरीअत की हिदायतों पर मुकम्मल अमल करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन।

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