musalmano ko fayeda aur nafa pahunchana अल्लाह की रज़ा हासिल करने का अज़ीम ज़रिया

आज के दौर में देखा जाए तो लोग दूसरों की मदद करने लोगों को नफा और फाएदा पहुंचाने के मुआमले में गाफिल नज़र आते हैं हालाँकि यह काम...

इस्लाम एक ऐसा दीन है जो सिर्फ इबादात ही की तालीम नहीं देता बल्कि इंसानों के साथ ख़ैरख़्वाही हमदर्दी और नफ़ा रसानी का भी दर्स देता है। एक सच्चा मुसलमान वही है जिसके वजूद से दूसरों को सुकून राहत और फाएदा पहुँचे। इस हक़ीक़त पर रौशनी डालते हुए सरकार आला हज़रात इमाम अहले सुन्नत मुजद्दिदे दीन व मिल्लत अश्शाह इमाम अहमद रज़ा खान बरेलवी रहमतुल्लाह अलैह ने निहायत ख़ूबसूरत अंदाज़ में बयान फरमाया: आला हज़रत फरमाते हैं: मुसलमानों को नफ़ा रसानी (यानी फाएदा पहुँचाने) से अल्लाह अज़्ज़ व जल की रज़ा व रहमत मिलती है और उसकी रहमत दोनों जहान का काम बना देती है। (फ़तावा रज़विया ज 9 स 623 रज़ा फाउंडेशन लाहौर)

नफ़ा पहुँचाने का मतलब

नफ़ा रसानी और फाएदा पहुंचाना क्या है नफ़ा रसानी और फाएदा पहुंचाना सिर्फ माली मदद का नाम नहीं बल्कि हर वह काम जिससे किसी मुसलमान को फाएदा पहुँचे राहत मिले या उसकी परेशानी दूर हो यह सब काम नफ़ा रसानी में शुमार होते हैं।  जैसे के किसी भूखे को खाना खिलाना अगर कोई परेशान हाल है तो उसकी मदद करना कोई बीमार है तो बीमार की इयादत करना और  किसी को अच्छी बात सिखा देना रास्ते में अगर कोई नुकसान पहुंचाने वाली चीज़ पड़ी हो तो उस तकलीफदेह चीज़ को रास्ते से हटा देना इसी तरह किसी के लिए आसानी पैदा करना यह सब अमल यह सब काम लोगों को नफ़ा और फाएदा पहुंचाने में शामिल हैं और ये सब अल्लाह तआला के नज़दीक महबूब आमाल हैं।

आज के दौर में देखा जाए तो लोग दूसरों की मदद करने लोगों को नफा और फाएदा पहुंचाने के मुआमले में गाफिल नज़र आते हैं हालाँकि यह काम यानी लोगों को नफ़ा पहुंचाना अल्लाह तआला की रज़ा हासिल करने का एक आसान रास्ता है कि बंदा अल्लाह के बंदों के काम आए।

अल्लाह की रहमत किन लोगों पर नाज़िल होती है

अब सरकार आला हज़रत के इस फरमान को पढ़ें के आला हज़रत रहमतुल्लाह अलैह फरमाते हैं कि मुसलमानों को नफ़ा रसानी यानी फाएदा पहुँचाने से अल्लाह अज़्ज़ व जल की रज़ा व रहमत मिलती है। गौर कीजिए जब अल्लाह राज़ी हो जाए तो इंसान की ज़िंदगी संवर जाती है राहत और सुकून हासिल हो जाता है दुनिया की परेशानियाँ आसान और ख़त्म हो जाती हैं और आख़िरत की कामयाबी भी नसीब हो जाती है।

अल्लाह की रहमत ऐसी अज़ीम नेमत है कि अगर बंदे पर हो जाए तो उसकी दुनिया भी बेहतर हो जाती है और आख़िरत भी कामयाब हो जाती है। और अल्लाह की रहमत व रज़ा हासिल करने का एक ज़रिया खिदमत ए खल्क है  इसी लिए इस्लाम में ख़िदमते ख़ल्क का मकाम बहुत बुलंद है खिदमत ए खल्क अल्लाह का क़ुर्ब हासिल करने का ज़रिया है।

आज के मुआशरे की अफ़सोसनाक सूरते हाल

जब हम अपने मुआशरे को देखते हैं तो बड़ा अफ़सोस होता है के आज हमारे मुआशरे में खुदगर्जी बढ़ती जा रही है लोग सिर्फ अपने फाएदे का सोचते हैं। किसी गरीब का नहीं सोचते मजबूर या परेशान इंसान की मदद  का नहीं सोचते, मदद करना तो दूर बाज़ औकात तो यह भी देखने को आता है के लोग दूसरों को तकलीफ पहुँचाने में भी हिचकिचाते नहीं। हालाँकि एक मुसलमान को कैसा होना चाहिए उसका दिल कैसा होना चाहिए  एक मुसलमान का दिल रहम मोहब्बत और ख़ैरख़्वाही से भरा होना चाहिए। हमें सोचना चाहिए कि अगर हम किसी के काम आ जाएँ किसी के आँसू पोंछ दें किसी की मुश्किल आसान कर दें तो हो सकता है यही अमल हमारी बख्शिश का सबब बन जाए।

नफ़ा रसानी के चंद आसान तरीके

नफ़ा रसानी के आसान तरीकों में से एक यह है की किसी गरीब की माली मदद कर देना इसी तरह वालिदैन की ख़िदमत करना और रिश्तेदारों और पड़ोसियों का ख़याल रखना इल्मे दीन सिखाना किसी परेशान इंसान की बात मोहब्बत से सुन लेना सोशल मीडिया पर अच्छी और फाएदा मंद बातें फैलाना लोगों के लिए आसानी पैदा करना वगैरह यह अमल नफा रसानी के ज़ुमरे में आते हैं और ये छोटे छोटे आमाल अल्लाह तआला की बारगाह में बहुत मुकाम रखते हैं।

एक सच्चे मुसलमान की पहचान

हक़ीक़ी और सच्चा मुसलमान वही है जिससे दूसरों को ख़ैर पहुँचे। उसकी ज़बान उसके अख़लाक़ उसके मुआमलात और उसका किरदार लोगों के लिए राहत का सबब बने। अगर हमारे वजूद से दूसरों को सुकून मिले तो यही इस्लाम की खूबसूरती है। नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पूरी ज़िंदगी इंसानियत के लिए रहमत है। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमेशा लोगों के दुख दर्द बाँटे कमज़ोरों का सहारा बने और उम्मत को भी यही तालीम दी कि लोगों के लिए आसानी पैदा करो उनकी मदद करो लोगों के साथ भलाई करो।

इख़्तिताम

इस पूरे मज़मून से हमें यह सबक मिला के हम बंदगाने ख़ुदा को फायदा पहुँचाकर अल्लाह तआला की रज़ा हासिल कर सकते हैं। अज़ीज़ाने गिरामी अगर हम चाहते हैं कि हमारी दुनिया भी संवर जाए और आख़िरत भी कामयाब हो जाए तो हमें दूसरों के लिए फायदा मंद बनना होगा। अल्लाह तआला हमें ऐसा मुसलमान बनाए जो अपनी ज़ात से दूसरों को राहत सुकून और फाएदा पहुँचाने वाला हो। आमीन।

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