अल्लाह तआला ने इंसान को अपनी मख़लूक़ात में सबसे ज़्यादा इज़्ज़त और अज़मत अता फ़रमाई है। और अशरफुल मखलूक़ात बनाया। इंसान को ऐसी बेशुमार नेअमतों से नवाज़ा गया है जिनका सही तौर पर हिसाब लगाना भी मुमकिन नहीं। अगर इंसान अल्लाह की नेअमतों पर ग़ौर करता रहे तब भी वह उनको गिन नहीं सकता शुमार नहीं कर सकता। क़ुरआन-ए-पाक में अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाता है कि: "अगर तुम अल्लाह की नेअमतों को गिनना चाहो तो शुमार नहीं कर सकते सकते।
नेअमतें और उनका शुक्र
इन नेअमतों में सबसे बड़ी नेअमत यह है कि अल्लाह तआला ने हमें इंसान पैदा फ़रमाया। फिर चलने के लिए पाँव दिए पकड़ने और काम करने के लिए हाथ दिए देखने के लिए आँखें अता कीं सुनने के लिए कान दिए सोचने के लिए दिमाग़ दिया फ़ैसला करने के लिए दिल दिया और बोलने के लिए ज़बान अता फ़रमाई। यह तमाम आज़ा और क़ुव्वतें अल्लाह तआला की बहुत बड़ी नेअमतें हैं।
अल्लाह ने हमें बे शुमार नेमतों से नवाज़ा है और इन नेअमतों का शुक्र अदा करना भी ज़रूरी है। और शुक्र का सही तरीक़ा यही है कि इंसान अपने तमाम आज़ा को अल्लाह तआला के फ़रमान और शरीअत के मुताबिक़ इस्तेमाल करे।
अल्लाह की नेअमतों का सही इस्तेमाल
1. पाँव Feet पाँव अल्लाह की बड़ी नेअमत हैं। इनका इस्तेमाल चोरी क़ त्ल-ओ-ग़ारत गुनाह की महफ़िलों और क्लबों में जाने के लिए नहीं होना चाहिए। बल्कि इन पाँवों को मस्जिदों मदरसों महफ़िले-नात-ओ-किरात और नेक कामों की तरफ़ चलना चाहिए।
2. हाथ Hands हाथ भी अल्लाह की अमानत हैं। इन हाथों से नेक काम किए जाएँ ग़रीबों की मदद की जाए क़ुरआन-ए-पाक उठाया जाए इल्म हासिल किया जाए और लोगों के लिए आसानी पैदा की जाए। हराम और ज़ुल्म के कामों से इन हाथों को बचाया जाए।
3. कान Ears कानों का सही इस्तेमाल यह है कि उनसे क़ुरआन-ए-पाक सुना जाए नात शरीफ़ सुनी जाए वाज़-ओ-नसीहत सुनी जाए और ऐसी बातें सुनी जाएँ जो इंसान के ईमान और अख़लाक़ को मज़बूत करें। गाने म्यूज़िक और बेहूदा बातों से अपने कानों की हिफ़ाज़त करनी चाहिए।
4. दिमाग़ और दिल Mind and Heart दिमाग़ भी अल्लाह की बड़ी नेअमत है। इंसान को चाहिए कि वह अपने दिमाग़ में अच्छी सोच रखे और बुरी गंदी और गुनाह वाली सोचों से अपने आपको बचाए। इसी तरह दिल से अच्छे फ़ैसले किए जाएँ और ऐसे फ़ैसलों से बचा जाए जो इंसान को गुनाह और तबाही की तरफ़ ले जाएँ।
5. ज़बान Tongue ज़बान का इस्तेमाल भी बहुत एहतियात के साथ होना चाहिए। ज़बान से अच्छी बातें निकाली जाएँ क़ुरआन-ए-पाक की तिलावत की जाए हदीस-ए-रसूल पढ़ी जाए नात-दुरूद का विर्द किया जाए और लोगों से नरमी और मोहब्बत के साथ बात की जाए। गाली-गलौच झूठ चुग़ली और गानों में ज़बान को मसरूफ़ न रखा जाए।
क़यामत के दिन आज़ा की गवाही
अगर इंसान इन नेअमतों का ग़लत इस्तेमाल करेगा तो यही आज़ा क़यामत के दिन उसके ख़िलाफ़ गवाही देंगे। जिन हाथों पैरों आँखों और ज़बान पर आज इंसान नाज़ करता है वही उसके लिए अज़ाब का सबब बन सकते हैं।
हर अज़्व का ग़लत इस्तेमाल इंसान के लिए नुक़सान और वबाल का बाइस है लेकिन ज़बान का गुनाह सबसे ज़्यादा ख़तरनाक है। बहुत बार इंसान सिर्फ़ लोगों को ख़ुश करने या मज़ाक़ में ऐसी बात कह देता है जिसमें अल्लाह तआला की नाराज़गी होती है और वही एक कलिमा उसको जहन्नम तक पहुँचा देता है।
अहादीसे मुबारका हदीसें
हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया:
"إِنَّ الْعَبْدَ لَيَتَكَلَّمُ بِالْكَلِمَةِ مِنْ سَخْطِ اللَّهِ لَا يُلْقِي لَهَا بَالًا يُهْوَى بِهَا فِي جَهَنَّمَ" (बुख़ारी शरीफ़)
तर्जुमा: बंदा कभी ऐसा कलिमा कह देता है जिसमें अल्लाह तआला की नाराज़गी होती है। वह उसकी परवाह भी नहीं करता लेकिन उसी एक कलिमा की वजह से उसे जहन्नम में डाल दिया जाता है।
एक दूसरी रिवायत में आता है: "يُهْوَى بِهَا فِي النَّارِ أَبْعَدَ مَا بَيْنَ الْمَشْرِقِ وَالْمَغْرِبِ"
तर्जुमा: उस एक कलिमा की वजह से इंसान को मशरिक़ और मग़रिब के दरमियान दूरी जितना दूर जहन्नम में फेंक दिया जाएगा।
इसलिए इंसान को सबसे ज़्यादा अपनी ज़बान की हिफ़ाज़त करनी चाहिए क्योंकि यही ज़बान इंसान को जन्नत तक भी पहुँचा सकती है और जहन्नम तक भी।
हासिले मज़मून
अल्लाह तआला ने इंसान को बेशुमार नेअमतों से नवाज़ा है और हर नेअमत एक अमानत है। इन नेअमतों का असली शुक्र यही है कि इंसान उनको शरीअत और अल्लाह तआला के हुक्म के मुताबिक़ इस्तेमाल करे। पाँव नेक रास्तों पर चलें हाथ अच्छे कामों में लगें कान दीन की बातें सुनें दिमाग़ अच्छी सोच रखे दिल सही फ़ैसले करे और ज़बान हमेशा भलाई की बातें करे।
अगर इंसान अपने आज़ा की हिफ़ाज़त करेगा और उनको गुनाहों से बचाएगा तो वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होगा। लेकिन अगर इन नेअमतों का ग़लत इस्तेमाल किया गया तो यही आज़ा क़यामत के दिन उसके ख़िलाफ़ गवाही देंगे।
दुआ: अल्लाह तआला हमें अपनी तमाम नेअमतों की क़दर करने उनका शुक्र अदा करने और उनको अपनी रज़ा के मुताबिक़ इस्तेमाल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन। इस पोस्ट को शेयर करें और सवाब के हक़दार बनें।
