ख्वाब की हक़ीक़त इन इस्लाम – अच्छे और बुरे ख्वाब का मतलब

ख्वाब की हक़ीक़त क्या है क्या शैतान ख्वाब में आ सकता है इस्लाम की रोशनी में जानिए अच्छे और बुरे ख्वाब की सच्चाई और उनसे बचने के तरीके।

इंसान की ज़िंदगी में ख्वाब एक ऐसा पहलू है जो हर रात उसके साथ जुड़ा रहता है मगर अक्सर हम इसकी हक़ीक़त और असलियत से नाआशना रहते हैं। कभी यही ख्वाब दिल को सुकून देते हैं और कभी इंसान को डर और बेचैनी में मुबतिला कर देते हैं जिससे उसके ज़ेहन में कई तरह के सवाल पैदा होते हैं। इन्हीं अहम सवालात को सामने रखते हुए इस मज़मून में हम यह समझने की कोशिश करेंगे कि ख्वाब की हक़ीक़त क्या है क्या शैतान ख्वाब में आ सकता है आज की इस पोस्ट में हम इन्हीं सवालों के जवाब जानेंगे अहादीस मुबारक और उलमा ए किराम के ब्यान की रोशनी में, आसान अंदाज़ में।

क्या शैतान ख्वाब में आ सकता है – इसकी हक़ीक़त क्या है

जब हम यह सवाल करते हैं कि क्या शैतान ख्वाब में आ सकता है तो इसका जवाब है जी हाँ आ सकता है। उलमा ए किराम ने साफ तौर पर फ़रमाया है कि शैतान इंसान को डराने और परेशान करने के लिए ख्वाब का सहारा लेता है। वह अलग-अलग शक्लों में आकर इंसान के दिल में खौफ डालने की कोशिश करता है। ऐसे ख्वाब आमतौर पर अजीब डरावने और बेचैनी पैदा करने वाले होते हैं। इनका मकसद सिर्फ एक होता है इंसान को परेशान करना और डराना।

ख्वाब की किस्में और अल्क़ाए शैतान का मतलब

ख्वाब की किस्मों में एक खास किस्म होती है जिसे “अल्क़ाए शैतान” कहा जाता है। इस तरह के ख्वाब में शैतान इंसान के साथ खेलता है उसे डराता है उलझन में डालता है और कभी-कभी ऐसे मंजर दिखाता है जो इंसान को अंदर से हिला देते हैं। ये ख्वाब सच्चे नहीं होते बल्कि सिर्फ एक धोखा होते हैं  जिसका मकसद इंसान को कमजोर करना होता है।

हुज़ूर की रहनुमाई ख्वाब के बारे में हदीस

नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इस मामले में बहुत साफ रहनुमाई फरमाई है। हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया:जिसने मुझे ख्वाब में देखा उसने हकीकत में मुझे ही देखा क्योंकि शैतान मेरी सूरत इख्तियार नहीं कर सकता। इस हदीस से यह बात बिल्कुल साफ हो जाती है कि शैतान हर शक्ल में आ सकता है लेकिन नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सूरत  में नहीं।

इमाम अहमद रज़ा खान का बयान ख्वाब की तफसील

इमाम अहमद रज़ा खान अलैहिर्रहमा ने ख्वाब की चार किस्में बयान की हैं जिनमें से एक अल्क़ाए शैतान भी है। आला हज़रत फरमाते हैं  बुरे ख्वाब दरअसल शैतान की तरफ से होते हैं और इंसान को चाहिए कि वह ऐसे ख्वाब किसी से बयान न करे। क्योंकि जब इंसान बार-बार उसका ज़िक्र करता है तो वह और ज्यादा असर डाल सकता है। यह एक बहुत अहम और अमली नसीहत है।

बुरे ख्वाब से बचने के तरीके क्या करना चाहिए

अगर आपको कभी बुरा ख्वाब आ जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है बल्कि कुछ आसान अमल करने चाहिए: सबसे पहले बाईं तरफ हल्का सा तीन बार थूक दें “अऊज़ु बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम” पढ़ें कोशिश करें कि वुज़ू करके दो रकअत नफ़्ल नमाज़ पढ़ लें ये छोटे-छोटे अमल शैतान के असर को खत्म कर देते हैं और दिल को सुकून देते हैं।

अच्छे और बुरे ख्वाब में फर्क समझना जरूरी है

हर ख्वाब एक जैसा नहीं होता। अच्छा ख्वाब अल्लाह की तरफ से होता है यह खुशखबरी देता है दिल को सुकून देता है और इंसान को अल्लाह के करीब करता है। जबकि बुरा ख्वाब शैतान की तरफ से होता है जो सिर्फ डर और बेचैनी फैलाता है। इसलिए जरूरी है कि हम दोनों में फर्क समझें और हर ख्वाब को दिल पर न लें।

बुरे ख्वाब से घबराना नहीं एक अहम नसीहत 

बहुत से लोग बुरा ख्वाब देखकर दिन भर परेशान रहते हैं और हर किसी को बताते फिरते हैं यह तरीका सही नहीं है। हमें चाहिए कि हम ऐसे ख्वाब को नजरअंदाज करें और अल्लाह की पनाह लें। याद रखें जो अल्लाह की पनाह में आ गया शैतान उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

खुलासा ख्वाब का सही नज़रिया क्या होना चाहिए

आखिर में बात को समेटें तो यह समझ आता है कि शैतान ख्वाब में आ सकता है लेकिन उसका असर हम पर तभी होता है जब हम डर जाते हैं। नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तालीमात हमें सिखाती हैं कि बुरे ख्वाब से घबराना नहीं है बल्कि अल्लाह की तरफ रुजू करना है। अगर हम सही तरीका अपनाएं तो कोई भी बुरा ख्वाब हमें नुकसान नहीं पहुंचा सकता।

आखिरी बात खुलासा

ख्वाब हमारी ज़िंदगी का हिस्सा हैं अच्छे ख्वाब अल्लाह की तरफ से  सुकून देते हैं, जबकि बुरे ख्वाब शैतान की तरफ से सिर्फ डराने के लिए होते हैं।

इसलिए बुरे ख्वाब से घबराने के बजाय अल्लाह की पनाह लें और यक़ीन रखें कि शैतान आपको नुकसान नहीं पहुंचा सकता।

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