दोस्तों आज हम बात करेंगे रिया कारी का वबाल जानिए क्यों ये हमारी नेकियों को जला देता है ज़ाए कर देता है भाइयों दिखावा हम में से हर एक के दिल में घर कर चुका है लेकिन हम अनदेखी कर देते हैं। सोशल मीडिया के इस दौर में हर कोई अपनी नेकी का ढोल बजाने में लगा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है जो लोग अपने नेक अमल नमाज़ रोज़ा सदक़ा हज वगैरह को लोगों को दिखाने के लिए करते हैं उनका क्या अंजाम होगा क्या उन्हें अल्लाह के यहाँ कोई अज्र मिलेगा या फिर उनके लिए एक अलग ही सज़ा है रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक हदीस में रियाकार की सख्त सज़ा ब्यान फरमाई है कि जिसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएँगे। हम अक्सर यह भूल जाते हैं कि हमारे अमल और वो पोस्ट वो स्टोरीज़ वो वीडियोज जो हम सोशल मीडिया में डालते हैं कहीं हमारे लिए रुसवाई का सबब तो नहीं बन रहे तो चलिए बिना किसी लाग-लपेट के आज इस पोस्ट में हम जानेंगे कि आखिर रिया कारी यानी दिखावा क्या है यह हमारी नेकियों को कैसे जला डालता है और सबसे खतरनाक बात क़यामत के दिन उन लोगों के साथ क्या होगा जो दुनिया में तारीफ़ पाने के लिए अमल करते थे। अगर आप भी अपनी नेकियों को बचाना चाहते हैं और आखिरत में कामयाबी पाना चाहते हैं तो ये पोस्ट आपके लिए है। तो पढ़ना शुरू कीजिए।
हदीस मुबारक और उसका पैग़ाम जब रसूलुल्लाह ने रिया कारी का नुकसान बयान किया
आइए सबसे पहले हदीस मुबारक पढ़ते हैं जिसमें रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने रिया कारी का जो नुकसान है और जो उसकी सज़ा है बयान फरमाई है।हदीस का मतन और तर्जुमा: हज़रत अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अन्हुमा से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया:
"مَنْ سَمَّعَ النَّاسَ بِعَمَلِهِ ، سَمَّعَ اللهُ بِهِ سَامِعَ خَلْقِهِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ، وَحَقَّرَهُ وَصَغَرَهُ" (मुस्नद अहमद: 6986, तबरानी: अल-मुजम उल-कबीर — सहीह)
तर्जुमा: जो शख़्स लोगों को सुनाने (शोहरत पाने) के लिए कोई अमल करता है अल्लाह तआला क़यामत के दिन अपनी मख़लूक़ के कानों तक उस की (बदनीयती) पहुँचा देगा फिर उसे ज़लील और रुसवा करेगा।
तस्मीअ का मफ़्हूम यानी अपनी नेकी का चर्चा करना लोगों को सुनाने की बीमारी
तस्मीअ क्या चीज़ है? तस्मीअ का मतलब है अपनी नेकी और अमल का चर्चा करना लोगों को बताना कि देखो मैं कितना नमाज़ी हूँ कितना रोज़ादार हूँ कितना सदक़ा करने वाला हूँ वगैरह। और यह सब बताने का मक़सद होता है कि लोग तारीफ़ करें वाह वाह करें और मुझे नेक समझें लेकिन याद रखिए ये रिया कारी ही की एक ख़तरनाक क़िस्म है जिसका ताल्लुक़ दिल की ख़राबी से है।
अमल का बदला जैसी करनी वैसी भरनी दुनिया में तारीफ़ तो आख़िरत में रुसवाई
दुनिया में ये शख़्स चाहता था कि लोग उसकी तारीफ़ सुनें उसकी नेकियों की धूम मचे। लेकिन आख़िरत में क़यामत के रोज़ अल्लाह उसको तमाम मख़्लूक़ के सामने ज़लील व रुसवा कर देगा। हर कोई जान लेगा कि ये शख़्स दिखावे के लिए अमल करता था। सोचिये जहाँ सारी मखलूक जमा होगी वहाँ ये रियाकार शख़्स का हाल क्या होगा अल्लाह की पनाह।इख़्लास की अहमियत क्योंकि नेकी की क़बूलियत की पहली शर्त सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा है
भाइयो और बहनो नेकी की क़बूलियत की पहली और सबसे अहम शर्त इख़्लास है यानी अमल सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा के लिए हो अगर कोई अमल अल्लाह के लिए नहीं बल्कि लोगों को दिखाने के लिए है तो उसका कोई अज्र नहीं। बल्कि ये अमल इंसान के लिए अज़ाब का सबब बन जाएगा।अल्लाह तआला क़ुरआन में फरमाता है:
"فَمَنْ كَانَ يَرْجُو لِقَاءَ رَبِّهِ فَلْيَعْمَلْ عَمَلًا صَالِحًا وَلَا يُشْرِكْ بِعِبَادَةِ رَبِّهِ أَحَدًا" (अल-कहफ़: 110)
तर्जुमा जो शख़्स अपने रब की मुलाक़ात की उम्मीद रखता हो उसे चाहिए कि नेक अमल करे और अपने रब की इबादत में किसी को शरीक न करे।
