कुरान का कुछ हिस्सा ज़रूर याद रखो - जानें अहमियत

कुरान का कुछ हिस्सा ज़रूर याद रखें, इस मज़मून में कुरान याद करने की अहमियत कुरान की फज़ीलत और याद करने का तरीका बताया गया है।

एक बहुत बड़ा मकान है; कभी शायद उसमें रौनक हुआ करती होगी। लोग आते-जाते होंगे, लोग उसमें रहते होंगे। मगर आज उस मकान में कोई रहने वाला नहीं है। न किसी कमरे में चिराग जलता है, और न कोई रौशनी है, दरवाज़े खामोश हैं, खिड़कियाँ वीरान हैं, दीवारें खस्ता-हाल हो चुकी हैं, छत जगह-जगह से टूट चुकी है। अन्दर घुप अँधेरा है, और चारों तरफ ऐसा सन्नाटा है के, इन्सान वहाँ जाने से डरे, वहां खड़े होने से घबराए।

अब बताइए! क्या हम ऐसे मकान को आबाद मकान कहेंगे? नहीं! हम ऐसे मकान को खंडहर कहेंगे, और ऐसे मकान को वीरान मकान कहेंगे। क्यूंकि जिस मकान में कोई न रहता हो, और न कोई रौशनी हो, न कोई रौनक हो, और न ही ज़िन्दगी की कोई निशानी हो। तो ऐसा मकान कितना ही बड़ा क्यों न हो, हकीकत में वह वीरान ही है।

ठीक इसी तरह से हमारा सीना भी एक घर है, एक मकान है। हो सकता है हमारा घर बड़ा हो, इमारत आलिशान हो, बिल्डिंग खूबसूरत हो, हमारे पास माल ओ दौलत हो, अच्छा कारोबार हो, या अच्छी सी नौकरी हो, गाड़ियां हों, आराम की सारी चीज़ें मौजूद हों, और लोगों की नज़र में हम बहुत कामयाब हों, लेकिन हमारे सीने में कुरान नहीं है, तो हमें अपने इस अंदरूनी घर की हालत पर गौर करना चाहिए। क्यूंकि जिस सीने में कुरान नहीं, वह सीना भी वीरान घर की तरह है।

सीना वीरान घर की तरह

नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया: "जिसके सीने में कुरान नहीं, वह वीरान घर की तरह है" (जामे तिरमिज़ी, सुनन दारमी)।

इस हदीस शरीफ में हमारे लिए बड़ी नसीहत है, बड़ा सबक है। फ़रमाया गया: वह सीना वीरान घर की तरह है, जिस सीने में कुरान नहीं है। यानी जिस तरह से मकान की रौनक मकान की आबादी, उसके मकीन से है, मकान में रहने वाले से है, साहिबे खाना से है। इसी तरह दिल की रौनक और आबादी कुरान-ए-करीम को याद रखने से है।

कुरान का कुछ हिस्सा याद करना

कुरान का हुछ हिस्सा याद करना हर मुसलमान के लिए ज़रूरी है। इसलिए हर मुसलमान को चाहिए के, कुरान ए करीम को याद करे, और कम से कम इतना कुरान मजीद ज़रूर याद होना चाहिए, के जिससे नमाज़ अदा हो सके,बुनियादी इबादतें अदा हो सकें। सूरह फातिहा, सूरह वद्दुहा , सूरह वत्तीन, सूरह अलम नशरह, और सूरह फील से सूरह नास तक यह सूरह तो याद ही होना ज़रूरी है। और याद ऐसे करें, तजवीद और मखारिज के साथ याद करें, अगर आपको कुरान ए करीम तजवीद और मखारिज के साथ पढ़ना नहीं आता तो, किसी कारी, आलिम, हाफ़िज़, साहिबान से राब्ता करके उनसे तजवीद और मखारिज की अदाएगी सीखें। बच्चों को भी कुरान सिखाएँ याद करवाएँ।

कुरान सीखने और सिखाने की फज़ीलत

सबसे बेहतर शख्स

हज़रत उस्मान बिन अफ्फान रज़ीअल्लाहु अन्हु बयान करते हैं, के रसूलुल्लाह सल्लाहू अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया: तुम में सबसे बेहतर वह है, जिसने कुरान सीखा और दूसरों को सिखाया। (बुखारी शरीफ) एक और रिवायत में है, हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: यकीनन तुम में सबसे अफज़ल वह है, जिसने कुरान सीखा, और दूसरों को सिखाया। (बुखारी शरीफ)।

अल्लाह के ख़ास बन्दे

हज़रत अनस ब्यान करते हैं, के नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया: बेशक लोगों में से कुछ लोग, अल्लाह तआला के ख़ास बन्दे हैं। सहाबा-ए-किराम ने अर्ज़ किया, या रसूलल्लाह: वह कौन हैं? हुज़ूर नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया, कुरान पढ़ने और उसपर अमल करने वाले, अल्लाह तआला के दोस्त और उसके ख़ास बन्दे हैं। (सहीह इब्ने माजह)

माँ बाप को ताज पहनाया जाएगा

हुज़ूर ताजदार ए कायनात सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: "जिसने कुरान याद किया और उस पर अमल किया, कयामत के दिन उसके माँ बाप को ताज पहनाया जाएगा, जिसकी रौशनी सूरज की रौशनी से ज़्यादा होगी।"(अबू दाऊद)

यह अल्लाह तआला का बे पनाह लुत्फ़ ओ करम है, के बेटे की वजह से, उसके माँ बाप को भी बड़ा मक़ाम मिलता है, के कयामत के दिन ताज पहनाया जाएगा।

कुरान याद करने के आसान तरीके

कुरान याद करना मुश्किल नहीं है, आसान है। जैसा कि कुरान-ए-मजीद में अल्लाह फरमाता है: "और हमने कुरान का याद करना आसान कर दिया है। (सूरह कमर : 17)। अल्लाह तआला ने कुरान को याद करना आसान कर दिया है। ज़रूरत इस बात की है कि हम कुरान शरीफ याद करने के लिए मेहनत और कोशिश करें।

रोज़ाना कुरान याद करने का मामूल

हर रोज़ एक आयत या छोटी सूरत को याद करें, पहले थोड़ा-थोड़ा ही याद करें, थोड़ा याद करना भी बहुत बड़ी बात है, सआदत की बात है। जब आप हर रोज़ और लगातार याद करेंगे, तो आपका याद करने का जज़्बा इससे और बढ़ेगा। वैसे आपको जब भी वक़्त मिले, या आप अपने हिसाब से कुरान याद करने के लिए वक़्त मुक़र्रर कर सकते हैं, लेकिन सुबह का वक़्त, यानी फजर की नमाज़ से पहले या फजर की नमाज़ के बाद का वक़्त, कुरान याद करने के लिए बेहतरीन है, उस वक़्त दिमाग ताज़ा होता है, और जो भी याद किया जाए जल्दी याद होता है, दिमाग में महफूज़ होता है, याद रहता है। याद रहे के कुरान को सही तजवीद, मखारिज के साथ पढ़ें, सीखें, याद करें। अगर आपको तजवीद और मखारिज के साथ पढ़ना नहीं आता है तो, आप अपने करीब में जो क़ारी साहब हों या इमाम साहब हों उनसे मदद लें।

जो याद किया उसे दोहराते रहें

कुरान ए करीम की आपने जो भी सूरतें याद किए हैं, उनको बार बार दोहराएं, नमाज़ों में जो सूरत याद किये हैं, उन्हें पढ़ें। ताकि आपकी याद की हुई सूरतें पक्की हों। नमाज़ के अलावा भी उनको दोहराते रहें, ताकि आपने जो कुरान का हिस्सा या सूरतें याद की हैं, उन्हें न भूलें। हज़रत अबू अशअरी रज़ीअल्लाहु अन्हु से रिवायत है के, नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: कुरान से ताल्लुक बाक़ी रखो (उसको बराबर पढ़ते रहो) उस ज़ात की क़सम जिसके क़ब्ज़ा ए कुदरत में मेरी जान है। यकीनन कुरान पैरों में बंधन लगे ऊँटों से निकल भागने में ज़्यादा तेज़ है। (बुखारी, मुस्लिम, मिश्कात)।

एक और रिवायत में है, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: कुरान खूब याद करते रहो, क्यूंकि बिला शुबह वह रस्सियों से बंधे ऊँटों से ज़्यादा तेज़ निकल भागने वाला है। (बुखारी शरीफ)।

तो हमें चाहिए के कुरान मजीद हमने जो याद किया है, जो सूरतें याद की हैं, हम उनको बार बार पढ़ते रहें, उनको दोहराते रहें, ताके हमारे ज़हनों से न निकले, हमारे सीनों में महफूज़ रहे।

नतीजा और इख्तिताम

पूरे कुरान का हाफिज़ बनना बहुत बड़ी सआदत है, लेकिन अगर अभी यह मंजिल दूर लगती है तो, कम से कम कुरान का कुछ हिस्सा ज़रूर याद रखिए। और यह हर मुसलमान के लिए ज़रूरी है के वह कुरान का कुछ हिस्सा याद रखे, जिस सीने में कुरान नहीं, वह वीरान घर की तरह है। तो कुरान याद करें, थोड़ा ही क्यों न हो, रोजाना याद करने की कोशिश करें, याद करी हुई सूरतों को नमाज़ों में पढ़ें, अपने बच्चों को भी कुरान याद करवाएं, और कुरान पर अमल करें।

याद रखें: कुरान वह नूर है, जो दिल को आबाद करता है, सीने को रौशन करता है, कयामत के दिन पढ़ने वाले की सिफारिश करेगा, कुरान आखिरत में निजात का ज़रिया है। अल्लाह तआला हमें कुरान पढने, समझने, याद करने, उस पर अमल करने, और उसकी तालीम फैलाने की तौफीक अता फरमाए। 

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