mobile phone se ham dunia se jud gaye लेकिन अपनों से दूर हो गए

मोबाइल से फायदा भी है नुकसान भी है आइये और जानिए के किस तरह हम दुनिया के लोगों से तो जुड़ गए और इसी मोबाइल फ़ोन से अपनों से दूर हो गए।

आज का दौर तरक्की और तकनीक का दौर है आज हमारे हाथों में मोबाइल है स्मार्ट फ़ोन है जिससे हम किसी से भी बात कर सकते हैं विडियो कालिंग करके उससे बात कर सकते हैं उसे देख सकते हैं आदमी कहीं पर भी हो दुनिया के किसी भी कोने में हो मोबाइल के ज़रिये उससे बात कर सकते हैं और उसको देख सकते हैं और यह कुछ ही सेकंड में हो सकता है। इसी तरह हम मोबाइल में लोकल इंटरनेशनल ख़बरें पढ़ सकते हैं अपना कारोबार चला सकते हैं और तालीम सीखना चाहें इल्म हासिल करना चाहें तो वह भी हम मोबाइल से हासिल कर सकते हैं सीख सकते हैं।

हमारे घर का माहौल कैसा है

जहाँ आज हम आसानी से मोबाइल के ज़रिये इल्म तालीम वगैरह हासिल कर सकते दुनिया में किसी भी कोने पर बेठे आदमी से बात कर सकते हैं विडियो कॉल करके उसको देख सकते हैं, गर्ज़ के मोबाइल ने दुनिया को हमारे करीब कर दिया है, यह मोबाइल के फायदे हैं। लेकिन वहीँ हम अपने घर का माहौल देखें अपने घर का जाइज़ा लें, घर का माहौल कैसा है, तो मालूम पड़ेगा के आज हर घर में मोबाइल है घर के हर आदमी के पास मोबाइल है, और वह मोबाइल में ही मसरूफ है। बीवी शोहर से बात करना चाहती है मगर शोहर सोशल मीडिया में मसरूफ है, वालिदैन अगर अपने बेटों को कुछ कहना चाहते हैं कुछ समझाना चाहते हैं तो बेटों की तरफ से जवाब मिलता है अभी टाइम नहीं बाद में बताइए। किसी काम के लिए बोला जाए तो जवाब मिलेगा अभी नहीं बाद में कर दूंगा, हमें गौर करना चाहिए के हम मोबाइल के ज़रिये दुनिया से तो जुड़ गए, दुनिया से करीब तो हो गए, मगर अपनों से दूर हो रहे हैं इस पर हमें गौर करना चाहिए।

कुरान की तालीम

मां बाप के साथ कैसा रवय्या होना चाहिए इसके बारे में कुरान मजीद में है अल्लाह तआला फरमाता है وَ بِالْوَالِدَیْنِ اِحْسَانًا और माँ बाप के साथ अच्छा सुलूक करो (सूरह अल इसरा आयत 23)।

माँ बाप के साथ अच्छा सुलूक करने का हुक्म है, और हुस्ने सुलूक का मतलब सिर्फ यह नहीं है के आपने महीने में खर्च के लिए पैसा दे दिया और ज़िम्मेदारी ख़त्म, नहीं, बल्के माँ बाप के साथ बैठना, उनका हाल चाल पूछना उनकी खैरियत पूछना उनसे प्यार मुहब्बत से बात करना उनके लिए वक़्त निकालना यह भी हुस्ने सुलूक का हिस्सा है।

लेकिन क्या किया जाए आज की जेनरेशन के बारे में के माँ बाप तरस जाते हैं औलाद से बात करने के लिए उनको देखने के लिए मगर बेटे उसी घर में होते हुए भी मोबाइल में गेम खेलने या सोशल मीडिया पर अनजान लोगों के साथ चैटिंग करने में मसरूफ नज़र आते हैं।

एक ज़रूरी सवाल

ज़रा सोचिए के हम दिन में अपने मोबाइल की बेटरी को कितने बार देखते हैं बार बार नज़र बेटरी पर जाती है के अभी कितनी बेटरी खर्च हुई कितनी रह गई है, हम बेटरी को चार्ज करना नहीं भूलते, इसी तरह से सोचिए के हम दिन भर में अपने माँ बाप का चेहरा कितनी बार देखते हैं मुहब्बत से वालिदैन को कितनी बार देखते हैं सोचिए, जिस तरह से मोबाइल को रोज़ाना चार्ज करना ज़रूरी है, इसी तरह माँ बाप और रिश्तेदारों से मुहब्बत ज़रूरी है।

मां बाप के साथ नेकी करना

मां बाप के साथ नेकी यह है के उनकी फरमाबरदारी हो और इताअत की जाए उनका अदब व अहतराम किया जाए उनकी ज़रूरीयात पूरी की जाएँ और उनकी ज़रुरियात को अपनी ज़रुरियात पर मुक़द्दम रखा जाए और अगर ज़ुल्म करें तो भी उनकी इताअत की जाए अलबत्ता गैर शरई अहकाम में उनकी इताअत न की जाए फिर भी उनके साथ नरमी की जाए और अगर वह फौत हो जाएँ तो उनकी कब्र की ज़ियारत की जाए और उनके लिए इस्तिग्फार किया जाए इस्लाम ने वालिदेन को इस क़दर अहमियत दी है के अल्लाह करीम की ज़ात ए किब्रिया के बाद वालिदेन का ज़िक्र किया है। इस्लाम के इस हुक्म के पेशे नज़र हर आकिल व बालिग़ इंसान पर लाजिम है के वह अपने माँ बाप के साथ हुस्ने सुलूक करे।

सुन्नत से सीख

हुज़ूर नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत का मुताला करें आपकी ज़िन्दगी को पढ़ें तो मालूम होगा के आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सहाबा ए किराम के साथ बैठते सहाबा की बातें सुनते लोगों के साथ हुस्ने अख्लाक से पेश आते थे। इसी तरह आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने रिश्तेदारों के साथ हुस्ने सुलूक करने की ताकीद फरमाई है। तो हमें चाहिए के मान बाप और रिश्तेदारों के साथ अच्छा बर्ताव करें उनके साथ हुस्ने सुलूक करें और यह समझने की कोशिश करें, बलके अपने दिमाग में यह बात बिठालें के यह जो मोबाइल है जदीद तकनीक है यह हमारी ज़िन्दगी को आसान बनाने के लिए है रिश्ते तोड़ने या ख़त्म करने के लिए नहीं है।

खातिमा

आखिर में यही बात कहना चाहूँगा आप सभी से के मोबाइल खराब चीज़ नहीं है, लेकिन मोबाइल का गलत इस्तेमाल ज़रूर खराब है। याद रखिये जिस मोबाइल ने आपको हज़ारों लोगों से जोड़ दिया है और अगर इसी मोबाइल की वजह से आप अपने माँ बाप रिश्तेदारों से दूर हो रहे हैं तो इस बढती हुई दूरी पर ज़रूर ख्याल करना चाहिए। और यह भी याद रखिये के मोबाइल ज़िन्दगी ज़रुरत है लेकिन इस मोबाइल की वजह से माँ बाप रिश्तेदारों से मुहब्बत में कमी ना आए।

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