इंसान की ज़िंदगी में जिस तरह जिस्मानी सेहत की अहमियत है उसी तरह दिल और रूह की सेहत भी बहुत ज़रूरी है। अक्सर इंसान अपने जिस्म की बीमारी को जल्दी महसूस कर लेता है और उसके इलाज की फ़िक्र करता है लेकिन दिल और बातिन की बीमारियों पर तवज्जो नहीं देता और फिर बातिनी बीमारियाँ धीरे-धीरे इंसान की सोच उसके अख़लाक़ और उसके आमाल को मुतास्सिर करती रहती हैं और कई बार इंसान को इसका एहसास भी नहीं होता। इन्हीं बातिनी बीमारियों में एक बड़ी और ख़तरनाक बीमारी ग़ुरूर व तकब्बुर है।
बातिनी बीमारियाँ और इंसान का अंदरूनी हाल
जिस तरह ज़ाहिरी जिस्म में कोई मर्ज़ लाहिक हो जाए कोई बीमारी लग जाए जिस्म किसी बीमारी में मुब्तला हो जाए तो पूरा जिस्म बीमार पड़ जाता है इसी तरह इंसान की रूह व क़ल्ब और सोच व फ़िक्र से मुतअल्लिक भी कई अमराज़ हैं जिनकी वजह से रूह व क़ल्ब बीमार हो जाते हैं और जिन के बाइस इंसान का बातिन आलूदा व बीमार हो जाता है।
बातिनी बीमारियाँ बहुत सी हैं जैसे रियाकारी बुग़्ज़ व हसद हिर्स व लालच बदगुमानी ग़ुरूर व तकब्बुर ये सब बातिनी बीमारियाँ हैं कि जिनकी वजह से बातिन बीमार हो जाता है। ज़ेरे नज़र मज़मून में हम इन बातिनी बीमारियों में से एक बीमारी ग़ुरूर व तकब्बुर के बारे में बात करेंगे और ये बताएँगे कि ग़ुरूर व तकब्बुर क्या है और इसका इलाज क्या है और इलाज वह बताएँगे जिस के बारे में दीन-ए-इस्लाम ने हमारी रहनुमाई फ़रमाई है
ग़ुरूर व तकब्बुर क्या है?
क़ारईन। तकब्बुर बातिनी बीमारियों में से एक बड़ी बीमारी है। दिल की सिफ़ाते ज़मीमा में से है जिस का असर अमलन ज़ुहूर में आता रहता है जिसका असर इंसान के अमल से ज़ाहिर होता रहता है।
तकब्बुर क्या है? तकब्बुर ये है कि इंसान खुद को दूसरों से बेहतर व फ़ाइक़ समझे अपने कामों को दूसरों से अच्छा और ऊँचा जाने, कि मैंने जैसा काम किया वैसा कोई नहीं कर सकता वग़ैरह वग़ैरह। इस तरह के ख़यालात से उसके दिल में ग़ुरूर व तकब्बुर पैदा होता है।
तकब्बुर का अंजाम
ग़ुरूर व तकब्बुर वह बीमारी है जिसकी वजह से शैतान मर्दूद हुआ इसी बिना पर शैतान को मर्दूद क़रार दिया गया।
रब करीम इरशाद फ़रमाता है:
فَاهْبِطُ مِنْهَا فَمَا يَكُونُ لَكَ أَنْ تَتَكَبَّرَ فِيهَا فَاخْرُجْ إِنَّكَ مِنَ الصَّاغِرِينَ
तर्जुमा: तो यहाँ से उतर जा तुझे ये हक़ हासिल नहीं कि यहाँ रह कर ग़ुरूर करे निकल तू ज़िल्लत वालों में से है! (पारा 8 सूरह अल-आराफ आयत 13)
कि इंसान तेरी मज़म्मत करेगा और हर ज़ुबान तुझ पर लानत करेगी और यही तकब्बुर वाले का अंजाम है। (तफ़सीर ख़ज़ाइनुल इरफ़ान)
क़ारईन। देखा आपने ग़ुरूर व तकब्बुर का अंजाम।
तकब्बुर का एक इलाज
हज़रात! जैसे जिस्मानी बिमारी का इलाज दवा और परहेज़ से होता है वैसे ही तकब्बुर की बिमारी का इलाज रूहानी मुरक्कब है
हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इरशाद मुबारक है।
हज़रत सय्यिदना अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है नबी रहमत सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इरशाद फ़रमाते हैं:
«الْبَادِئُ بِالسَّلَامِ بَرِيءٌ مِنَ الْكِبْرِ» (शुअबुल ईमान)
तर्जुमा: सलाम में पहल करने वाला तकब्बुर से दूर हो जाता है। यानी जो शख्स मुसलमानों को सलाम कर लिया करे वह इंशा अल्लाह मुतकब्बिर न होगा उसके दिल में अज्ज़ व नियाज़ होगा। (मिरात अल मनाजीह)
खुलासा
इस पूरे मज़मून से यह बात सामने आती है कि ग़ुरूर व तकब्बुर इंसान के दिल की ऐसी बीमारी है जो इंसान को बर्बाद कर देती है हमें इस मज्मूम बिमारी से बचना चाहिए शैतान का अंजाम भी हमारे सामने है लिहाज़ा हमें इस्लामी तालीमात पर अमल करना चाहिए, इस्लाम इंसान को तवाज़ो इन्किसारी और अच्छे अख़लाक़ की तालीम देता है। और गुरूर व तकब्बुर का जो इलाज बताया गया है यानी सलाम में पहल करने का तो हमें चाहिए के हम मुसलमान को चाहे वह छोटा हो या बड़ा हो सलाम करना चाहिए जब हम सलाम करने की आदत बना लेंगे तो जो तकब्बुर की बातिनी बीमारी है वह ख़त्म हो जाएगी और इस अमल से यह भी फायदा होगा के मुसलमानों में आपसी एकता और मुहब्बत मज़बूत होगी।
अल्लाह तआला हमें अपने दिलों को हर बातिनी बीमारी से पाक रखने और तवाज़ो व इख़लास वाली ज़िंदगी गुज़ारने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
