अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन, वस्सलातु वस्सलामु अला रसूलिहिल करीम। अम्मा बअ्द, अल्लाह कुरान मजीद में फरमाता है: “व तआवनू अलल बिर्रि वत तक़वा” – नेकी और परहेज़गारी में एक दूसरे की मदद करो। और हमारे नबी हुज़ूर नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “अल्लाहु फ़ी अवनिल अब्दि मा कानल अब्दु फ़ी अवनि अख़ीहि” – बंदा जब तक अपने भाई की मदद में रहता है, अल्लाह तआला उसकी मदद में रहता है।
आज की गुफ्तगू का मौज़ू है “दूसरों के काम आना” के बारे में और साथ ही इसकी फ़ज़ीलत भी, दूसरों के काम आना, यह एक ऐसा अमल है जो मोमिन की पहचान है, दुनिया और आख़िरत की कामयाबी का सामान है, और नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की प्यारी सुन्नत है।
दूसरों के काम आना एक अज़ीम इबादत
दूसरों के काम आना” यानी लोगों की मदद करना, इस्लाम में बहुत बड़ी नेकी है। मुहतरम बुज़ुर्गो और अज़ीज़ भाइयो! “दूसरों के काम आना” सिर्फ़ एक अच्छी आदत या सामाजिक बर्ताव नहीं, बल्कि यह दीन का अहम हिस्सा और एक बहुत बड़ी इबादत है। इस्लाम में अक़ीदे के बाद सबसे ज़्यादा ज़ोर इंसानियत के साथ हुस्न-ए-सुलूक और ख़ैर-ख़्वाही पर दिया गया है। जब कोई शख़्स अपने भाई की मदद करता है, उसकी परेशानी दूर करता है, या उसके चेहरे पर मुस्कान लाता है, तो यह महज़ एक दुनियावी काम नहीं रहता; बल्कि यह अल्लाह तआला की रज़ा हासिल करने का ज़रिया बन जाता है। यही वह जज़्बा है जो एक मुसलमान को दूसरों के दुख-दर्द का शरीक बनाता है और मुआशरे को एक मज़बूत इमारत की तरह जोड़ता है। आइए अब हम अपने प्यारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की उन हदीसों को पढ़ते और समझते हैं, जिनमें दूसरों के काम आने की फ़ज़ीलत बयान की गई है।
दूसरों के काम आने की फ़ज़ीलत पर अहादीस
अल्लाह की मदद मिलती है: रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “वल्लाहु फ़ी अवनिल अब्दि मा कानल अब्दु फ़ी अवनि अख़ीहि” वल्लाहु फ़ी अवनिल अब्दि मा कानल अब्दु फ़ी अवनि अख़ीहि।
तर्जुमा: अल्लाह बंदे की मदद में रहता है जब तक बंदा अपने भाई की मदद में लगा रहता है। सहीह मुस्लिम 2699
तशरीह: दोस्तों जो शख़्स अपने मुसलमान भाई की मदद के लिए उठ खड़ा होता है, उसकी तकलीफ़ों को दूर करने की कोशिश करता है या उसकी जायज़ ज़रूरत पूरी करने में लग जाता है, तो अल्लाह तआला सिर्फ़ उसके अमल का बदला ही नहीं देता, बल्कि अल्लाह उसकी मदद फरमाता है। ग़ौर कीजिए! मालिक-ए-कायनात की मदद का मतलब है कि हर काम आसान हो जाएगा, हर मुश्किल दूर होगी और बंदे को वहाँ से मदद पहुँचेगी जहाँ से उसका गुमान भी नहीं हो सकता। यह हदीस हमें सिखाती है कि लोगों के काम आना उनकी मदद करना, अल्लाह तआला की मदद पाने का ज़रिया है।
सबसे महबूब अमल
नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछा गया: कौन सा अमल अल्लाह को सबसे ज़्यादा महबूब है? फ़रमाया:
अहब्बुन-नासि इलल्लाहि अन्फ़अहुम लिन्नास
अहब्बुन-नासि इलल्लाहि अन्फ़अहुम लिन्नास
तर्जुमा : अल्लाह के नज़दीक सबसे महबूब वह शख़्स है जो लोगों को सबसे ज़्यादा नफ़ा पहुँचाए।
तबरानी, सहीह अल-जामेअ 176
तशरीह: दूसरों को फायदा पहुंचाने वाला, नफ़ा पहुंचाने वाला वह सआदत मंद है जिसके बारे में नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया के वह अल्लाह के नज़दीक सबसे पसंदीदा शख्स है। “नफ़ा पहुँचाने” का मतलब बहुत वसीअ है – किसी को इल्म सिखाना, उसकी जान बचाना, उसका माल बचाना, उसकी इज़्ज़त की हिफ़ाज़त करना, रास्ते से तकलीफ़देह चीज़ हटाना, किसी भूखे को खाना खिलाना या किसी अंधे को रास्ता दिखाना — यह सब दूसरों के काम आने की सूरतें हैं। यह अमल दिल से तकब्बुर निकालता है और इंसान को अल्लाह के करीब कर देता है।
भाई की हाजत पूरी करना
मन काना फ़ी हाजति अख़ीहि कानल्लाहु फ़ी हाजतिहि, व मन फ़र्रजा अन मुस्लिमिन कुरबतन फ़र्रजल्लाहु अन्हु कुरबतम मिन कुरबि यौमिल क़ियामह”
मन काना फ़ी हाजति अख़ीहि कानल्लाहु फ़ी हाजतिहि, व मन फ़र्रजा अन मुस्लिमिन कुरबतन फ़र्रजल्लाहु अन्हु कुरबतम मिन कुरबि यौमिल क़ियामह
तर्जुमा: जो अपने भाई की ज़रूरत पूरी करने में लगा रहे अल्लाह उसकी ज़रूरत पूरी करता है। और जो किसी मुसलमान की परेशानी दूर करे, अल्लाह क़यामत की परेशानियों में से उसकी एक परेशानी दूर करेगा। सहीह बुख़ारी 2442
तशरीह : यह हदीस मोमिन के लिए उम्मीद का बेहतरीन पैग़ाम और मुज़दा है। अगर आप किसी इंसान की ज़रूरत पूरी करने में लग जाते हैं, तो अल्लाह तआला आपकी ज़रूरत और आपकी हाजत पूरी फरमाता है। इसी तरह अगर आपने सिर्फ़ एक बार किसी की दुनियावी परेशानी दूर की, तो अल्लाह तआला उसके बदले क़यामत की भयानक और सबसे बड़ी परेशानियों में से एक परेशानी आपसे दूर कर देगा। यह सौदा कितना मुनाफ़े का है! आपने एक छोटी-सी मदद की, लेकिन अल्लाह ने आपके ख़ाते में उस दिन की सबसे बड़ी निजात लिख दी, जिस दिन की हैबत से अक़्लें हैरान होंगी लोग नफ्सा नफ्सी के आलम में होंगे।
सदक़ा-ए-जारिया
ख़ैरुन-नासि मन ताला उमरुहु व हसुन अमलुहु”
ख़ैरुन-नासि मन ताला उमरुहु व हसुन अमलुहु
और बेहतरीन अमल लोगों के काम आना है। यहाँ तक कि रास्ते से तकलीफ़देह चीज़ हटाना भी सदक़ा है।
सहीह बुख़ारी 2989
तशरीह: रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बेहतरीन इंसान की पहचान बताई कि जिसकी उम्र दराज़ हो और उसका अमल अच्छा हो, वह सबसे बेहतर है। और बेहतरीन अमल में लोगों के काम आने को ख़ास तौर पर उजागर किया गया। फिर एक मामूली-सी नज़र आने वाली नेकी का ज़िक्र किया गया: रास्ते से तकलीफ़देह चीज़ हटाना। यह एक छोटा-सा काम है, लेकिन इसे सदक़ा कहा गया, यानी एक ऐसा नेक अमल जिसका अज्र बहुत बड़ा है। इससे मालूम हुआ कि नेकी करने के लिए बड़े माल-ओ-दौलत या बड़े इख़्तियार की ज़रूरत नहीं है। अगर आपके दिल में दूसरों के लिए ख़ैर का जज़्बा है, तो छोटे से छोटा काम भी सदक़ा-ए-जारिया बन सकता है। और अल्लाह का क़ुर्ब हासिल करने का ज़रिया बन सकता है।
ख़ूबसूरत अक़वाल
“मख़लूक़ अल्लाह का कुनबा है, पस अल्लाह को सबसे ज़्यादा महबूब वह है जो उसके कुनबे के साथ एहसान करे” · “लोगों के काम आओ, क्योंकि हाथ देने वाला हाथ लेने वाले से बेहतर है”
तशरीह: ये दोनों हिकमत भरे क़ौल इस्लामी तालीमात का लुब-ए-लुबाब हैं। पहला क़ौल बताता है कि सारी मख़लूक़ अल्लाह का कुंबा है। जब आप किसी इंसान, किसी जानवर यहाँ तक कि किसी पेड़-पौधे की मदद करते हैं, तो गोया आप अल्लाह के कुनबे की देखभाल कर रहे होते हैं, और ऐसा करने वाला अल्लाह का सबसे महबूब बंदा बन जाता है।
दूसरा क़ौल हमारे अंदर इनाइत और सख़ावत का जज़्बा पैदा करता है। सिर्फ़ लेना मोहताजी की निशानी है, जबकि देना फ़ैज़ और बा-असर होने की दलील है। जो हाथ दूसरों की मदद के लिए उठता है, वह अल्लाह के यहाँ बहुत प्यारा है। इसलिए हमें हमेशा देने वाला बनने की कोशिश करनी चाहिए, फिर चाहे वह दौलत की सूरत में हो, ताक़त की, इल्म की या फिर सिर्फ एक अच्छी सलाह और हमदर्दी की सूरत में।
ख़ुलासा
दूसरों के काम आना सिर्फ़ अख़लाक़ नहीं, इबादत है। इससे दुनिया में इज़्ज़त, रिज़्क़ में बरकत, और आख़िरत में अल्लाह की मदद मिलती है।
तशरीह : अज़ीज़ भाइयो! दूसरों के काम आना महज़ एक अच्छी ख़सलत नहीं, बल्कि एक अज़ीम इबादत है जो इंसान को अल्लाह की ख़ास मदद, दुनिया में इज़्ज़त और रिज़्क़ में बरकत का हक़दार बनाती है। यह एक ऐसी तिजारत है जिसमें कभी घाटा नहीं होता। अल्लाह तआला हम सबको अपने भाइयों और बहनों के काम आने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए, हमारी परेशानियाँ दूर करे, हमारी ज़रूरतें पूरी फ़रमाए और हमें उन बंदों में शामिल करे जो दूसरों को नफ़ा पहुँचाने वाले और अल्लाह के महबूब हैं।
