क्या शैतान इंसान के ख्वाब में आ सकता है: जानिए हदीस उलमा की राय और बचाव के तरीके

इस पोस्ट में जानिए क्या शैतान ख्वाब में आ सकता है? जानिए हदीस, उलमा की राय और बचाव के तरीके।

क्या शैतान इंसान के ख्वाब में आ सकता है? एक अहम शरई सवाल, ख्वाब की दुनिया अजीब-ओ-ग़रीब मनाज़िर, कभी खुशी तो कभी परेशानी लिए हुए होती है। अक्सर हम ऐसे ख्वाब देखते हैं जिनमें डर, खौफ़ और बेचैनी होती है। ऐसे में दिल में सवाल उठता है: ये बुरे ख्वाब कहाँ से आते हैं? क्या शैतान वाकई इंसान के ख्वाब में दाख़िल हो सकता है? अगर आता है तो क्या वह हमें नुक़सान पहुँचा सकता है? और सबसे अहम बात यह कि अगर कोई शख्स बुरा ख्वाब देख ले तो उसे क्या करना चाहिए?

यह वह सारे सवाल हैं जिनका जवाब हमें अहादीस-ए-मुबारका, उलमा-ए-किराम के बयानात और दीनी तालीमात में मिलता है। पेश-ए-नज़र मज़मून में हम उन्हीं सवालात को तफ़सील से समझेंगे। आइए जानते हैं कि शैतान किस तरह ख्वाब में आ सकता है, नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इस बारे में क्या फरमाया, इमाम अहल-ए-सुन्नत इमाम अहमद रज़ा खान अलैहिर्रहमा का इस मसअले में क्या मौक़िफ़ है, और अगर कोई शख्स बुरा ख्वाब देखे तो उससे बचाव के कौन से अमली रास्ते हैं। साथ ही यह भी जान लेंगे कि अच्छे और बुरे ख्वाब की हक़ीक़त क्या है और शैतान के शर से अल्लाह की पनाह कैसे हासिल की जाए।

यह मज़मून न सिर्फ़ आपके ज़हन में मौजूद उलझनों को दूर करेगा बल्कि ख्वाबों के हवाले से एक वाज़ेह शरई रहनुमाई भी फराहम करेगा।

क्या शैतान ख्वाब में आ सकता है?

जी हाँ, शैतान इंसान के ख्वाब में आ सकता है। यह कोई नई बात नहीं है बल्कि उलमा-ए-किराम ने हमेशा इस हक़ीक़त की तरफ तवज्जो दिलाई है। शैतान उमूमन मुख़्तलिफ़ शक्लों में आ कर इंसान को डराने और परेशान करने की कोशिश करता है। इसके लिए वह ख्वाब के पर्दे को इस्तेमाल करता है ताकि इंसान को खौफ़ज़दा किया जा सके।

इस सिलसिले में उलमा-ए-किराम ने ख्वाब की एक क़िस्म "अल्क़ाए शैतान" बयान फरमाई है। इस क़िस्म के ख्वाब में शैतान इंसान के साथ खेलता है, उसे खौफ़ में मुबतिला करता है और तरह तरह की परेशानियाँ पैदा करता है। ये ख्वाब उमूमन बेचैनी और घबराहट का बाइस बनते हैं।

नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की वाज़ेह रहनुमाई

इस हक़ीक़त को मज़ीद वाज़ेह करते हुए नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक बहुत अहम फरमान इरशाद फरमाया। हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया:

"जिसने मुझे ख्वाब में देखा उसने हक़ीक़त में मुझे ही देखा, क्योंकि शैतान मेरी सूरत इख़्तियार नहीं कर सकता।"

(मिश्कातुल मसाबीह, रक़म अल-हदीस: 1611, जिल्द 2, सफ़ा 55)

यह हदीस मुबारका हमें बताती है कि अगरचे शैतान मुख़्तलिफ़ शक्लों में आ सकता है, लेकिन नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सूरत में वह हरगिज़ नहीं आ सकता।

इमाम अहमद रज़ा खान का इल्मी बयान

इमाम अहल-ए-सुन्नत, इमाम अहमद रज़ा खान अलैहिर्रहमा ने इस मौज़ू पर बड़ी तफ़सील से रौशनी डाली है। वह फरमाते हैं कि ख्वाब की चार क़िस्में होती हैं, और उन्हीं में से एक क़िस्म "अल्क़ाए शैतान" है। ये वो ख्वाब हैं जो उमूमन खौफ़नाक और परेशान कुन होते हैं।

इमाम अहमद रज़ा खान अलैहिर्रहमा ने यह भी वाज़ेह किया कि ऐसे ख्वाब देखने वाले को चाहिए कि वह उन्हें किसी से बयान न करे। क्योंकि शैतान इसके ज़रिए इंसान को नुक़सान पहुँचाने की कोशिश कर सकता है। यह एक बहुत अहम तरबियती नुकता है जो हमें अमली ज़िंदगी में बड़ी रहनुमाई फराहम करता है।

(फ़तावा रज़विया, जिल्द 29, सफ़ा 87, रज़ा फ़ाउंडेशन, लाहौर)

बुरे ख्वाब से बचाव के अमली तरीक़े

अब सवाल यह है कि अगर कोई शख्स बुरा ख्वाब देख ले तो उसे क्या करना चाहिए? इस सिलसिले में उलमा-ए-किराम ने नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तालीमात की रौशनी में चंद अमली हिदायात दी हैं:

पहला तरीक़ा: जब बुरा ख्वाब आए तो फ़ौरन बाईं जानिब तीन मरतबा हल्का सा थूक दें। यह कोई बड़ा अमल नहीं है लेकिन इसकी बरकत बहुत ज़्यादा है।

दूसरा तरीक़ा: "أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّحِيمِ" पढ़ें। ये अलफ़ाज़ शैतान को दूर करने के लिए बहुत मुआसिर हैं।

तीसरा तरीक़ा: बेहतर यह है कि वज़ू कर के दो रकअत नफ़्ल अदा करें। जब आप अल्लाह तआला के हुज़ूर हाज़िर होते हैं तो शैतान आपसे दूर भागता है।

अच्छे और बुरे ख्वाब की हक़ीक़त

यह बात हमेशा ज़हन में रखनी चाहिए कि हर ख्वाब की एक हक़ीक़त होती है। अच्छा ख्वाब अल्लाह तआला की तरफ़ से खुशख़बरी होता है। यह ख्वाब दिल को सुकून देते हैं, इंसान को अल्लाह की रहमत की याद दिलाते हैं और रूहानी तौर पर तवानाई बख्शते हैं।

जबकि बुरा ख्वाब शैतान की तरफ़ से परेशानी होता है। इसका मक़सद इंसान को खौफ़ज़दा करना, उसकी नींद खराब करना और उसे ज़हनी तौर पर परेशान करना होता है। लेकिन याद रखें!जो अल्लाह की पनाह में आ जाता है शैतान उसका कुछ नहीं कर सकता है।

एक अहम तरबियती नुकता

बहुत से लोग बुरा ख्वाब देख कर घबरा जाते हैं, दिन भर परेशान रहते हैं और लोगों से उसका ज़िक्र करते फिरते हैं। यह तरीक़ा दुरुस्त नहीं है। बुरे ख्वाब से घबराने के बजाए हमें अल्लाह की पनाह इख़्तियार करनी चाहिए।

जो अल्लाह की पनाह में आ जाता है शैतान उसके करीब भी नहीं फटक सकता। अगर आपने बुरा ख्वाब देखा है तो यह समझ लें कि शैतान आपको डराना चाहता है, लेकिन आप अल्लाह का नाम ले कर उसके इस मंसूबे को नाकाम बना सकते हैं।

इख्तिताम

खुलासा यह कि शैतान इंसान के ख्वाब में आ सकता है, लेकिन इसके आसरात से बचना भी मुमकिन है। नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तालीमात हमारे लिए मशअल-ए-राह हैं। बुरा ख्वाब आने पर घबराने की ज़रूरत नहीं है, बल्कि अल्लाह की पनाह माँगें, बाईं तरफ थूक दें और अगर मुमकिन हो तो वज़ू कर के दो रकअत नफ़्ल पढ़ लें।

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